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राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुसाईंसर को मिला एनक्वास सर्टिफिकेट

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुसाईंसर को मिला एनक्वास सर्टिफिकेट
मिलेंगे 9 लाख रुपए इंसेंटिव
बीकानेर, 9 जून। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुसाईंसर एनक्यूएएस सर्टिफाइड अस्पताल बन गया है। इसके लिए पीएचसी को 3 साल तक 3-3 लाख रुपए इंसेंटिव प्राप्त होगा।
प्रदेश के पांच चिकित्सा संस्थानों को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट प्रदान करने के लिये चुना गया है। प्रदेश के 101 संस्थानों को पूर्व में ही नेशनल सर्टिफिकेशन मिलने के बाद अब और इन पांच संस्थानों सहित कुल 106 क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट विजेता राजकीय चिकित्सा संस्थान हो गए हैं जिनमे से 7 अस्पताल बीकानेर के हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री परसादी लाल मीना, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य श्रीमती शुभ्रा सिंह एवं मिशन निदेशक एनएचएम डॉ जितेंद्र कुमार सोनी ने स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन व सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट उपलब्धि अर्जित करने वाले इन चिकित्सा संस्थानों के सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मोहम्मद अबरार पंवार ने बताया कि डिप्टी सीएमएचओ डॉ योगेंद्र तनेजा के निर्देशन में अस्पताल के प्रभारी व स्टाफ के साथ-साथ पूरे काम, मूल्यांकन व प्रक्रिया को देखने वाली जिला स्तरीय टीम का बड़ा योगदान रहा है। दल में शामिल डॉ रोचक सोनी, नर्सिंग अधिकारी महिपाल सिंह, आयुष चिकित्सक डॉ गजेंद्र सिंह तंवर व पीएचएम रितेश गहलोत द्वारा पूरे जिले में एक-एक अस्पताल जाकर सभी मापदंडों अनुसार प्रशिक्षण, मूल्यांकन व संवर्धन कार्य करवाए गए।
ब्लॉक सीएमओ डॉ सुनील हर्ष ने बताया कि पीएचसी गुसाईंसर की चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ उत्कर्षा पुरोहित, लेखाकार पवन जोशी सहित पूरे स्टाफ ने कड़ी मेहनत कर इंफ्रास्ट्रक्चर, हाइजीन, सेवा गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता, मरीजों के अधिकार, रिपोर्टिंग व डाटा संधारण जैसे महत्वपूर्ण मानदंडों पर बेहतरीन अंक प्राप्त किए हैं। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक पीएचसी को 6 चेक लिस्ट अनुसार मानदंडों से गुजरना होता है और कम से कम 70% अंक प्राप्त करने होते हैं। प्रत्येक पीएचसी का स्वयं के स्तर, जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन करवाया जाता है।

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