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ईआरसीपी के लिए नहरी भूमि बेचने के संबंध में संयुक्त संघर्ष समिति ने भंवर पुरोहित के नेतृत्व में मुख्य अभियंता का किया घेराव

इंदिरा गांधी नहर परियोजना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक भंवर पुरोहित के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ईआरसीपी के लिए राजस्व इकठ्ठा करने के लिए जल संसाधन के अधीन नहर विभाग, सीएडी की भूमि नगर विकास न्यास, बीकानेर के माध्यम से बेचने के विरोध में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के मुख्य अभियंता श्री असीम मार्कण्डेय का घेराव किया गया।

पुरोहित ने मुख्य अभियंता को अवगत कराया कि वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने इस भूमि को बेचने के संबंध में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। तत्पश्चात् नहर बोर्ड अध्यक्ष, प्रमुख शासन सचिव जल संसाधन, मुख्य अभियंता इंगानप बीकानेर ने वर्ष 2010 मे पूर्ववर्ती राज्य सरकार को इस नहर भूमि को इंदिरा गांधी नहर परियोजना विभाग में कार्यरत मजदूर, कर्मचारी, अभियंतागण को रिजर्व प्राइस(डी.एल.सी दर) पर देने की अभिशंषा की थी।

वर्तमान सरकार ने भूमि को बेचने का जो नितिगत निर्णय लिया है, संघर्ष समिति के संयोजक भंवर पुरोहित ने विरोध करते हुए कहा कि इस नहर को विकट परिस्थितियों में नहर कर्मियों ने बनाया हैा अतः नहर कर्मियों को ही यह भूमि बेची जावें।

मुख्य अभियंता, इंगानप श्री असीम मार्कण्डेय ने संघर्ष समिति को आश्वस्त किया कि मुख्य अभियंता स्तर पर नहर कर्मियों के हित के लिए सकारात्मक प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को अतिशीघ्र भेजा जायेगा।

घेराव में इंग्नरपस के अध्यक्ष कमल अनुरागी, हितेश अजमानी, भामस के अध्यक्ष पुखसिंह राठौड़, कृष्णा कंवर, संजीव पाराशर, ईश्वर सिंह, बुद्धाराम, अशोक रंगा, रमेश पुरोहित, बद्रीनारायण, गोविन्दी सिंह, जेठमल सोलंकी, अशोक, जितेन्द्र कच्छावा, रमेश सोनी, अब्दुल करीम, तरूण, ऋषि, गणेश, रफीक अहमद, आदि कर्मचारी उपस्थित थे। कल इस मुद्दे पर संघर्ष समिति ने आवश्यक बैठक आहुत की है ताकि आगामी आन्दोलन की रणनिति बनाई जा सके।

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