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विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्रीडूंगरगढ़ में दर्ज किए प्रकरण को वापस लेने की मांग

नोखा – नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर श्रीडूंगरगढ़ में दर्ज किए प्रकरण को वापस लेने की मांग की ।

विधायक बिश्नोई ने बताया कि हाल ही में बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ कस्बे में एक नाबालिग लड़की को उसी की स्कूल की समुदाय विशेष की शिक्षिका द्वारा भगाकर ले जाने की सनसनीखेज वारदात घटित हुई थी और जैसे ही यह खबर फैली तो समूचे कस्बे की जनता में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया था । चूंकि यह बहुत असाधारण घटना थी और प्रशासन के लिए भी हालातों को संभाल पाना बहुत बड़ी चुनौती बन गया था।
ऐसे अति-संवेदनशील मौके पर श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के विभिन्न समाजों के मुखिया-मौजिज व समझदार लोगों ने जिला व पुलिस प्रशासन का साथ दिया और पीड़ित परिवार सहित आक्रोशित जनता के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा तथा भारी तनाव के बावजूद धीरज नहीं खोया और समस्या के अंत तक जिला प्रशासन का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देते रहे ।
यदि कस्बे के समझदार तबके ने उस दौरान स्थितियों को नहीं संभाला होता अथवा तनावपूर्ण हालातों के बीच उन्होंने भी आग में घी डालने का काम किया होता तो श्रीडूंगरगढ़ ही नहीं अपितु बीकानेर जिला भी सांप्रदायिक तनाव मेें आ जाता । यद्यपि हमारी पुलिस ने भी इस घटनाक्रम को बहुत गंभीरता से लिया और अपनी काबलियत के बल पर उस नाबालिग लड़की को दस्तयाब कर लिया गया । लड़की के साथ साथ उस शिक्षिका को भी हमारी पुलिस पकड़ लाई और धीरे-धीरे जनाक्रोश शांत हो गया ।
विधायक बिश्नोई ने कहा कि अत्यंत खेद के साथ लिखना पड़ रहा है कि इतनी विशाल घटना के बाद जिन लोगों ने आक्रोशित जनमानस के साथ निरंतर संपर्क बरकरार रखने में अपनी भूमिका निभाई और जिनके दम पर माहौल शांतिपूर्ण बना रहा, आज उन्हीं लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की निंदनीय कार्यवाही की गई है ।
ऐसा लगता है कि एक समुदाय विशेष को खुश करने की बेजा कोशिशों में आपकी सरकार बोरा गई है और जिन लोगों की वजह से न केवल करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्ति बची रही, बल्कि जानमाल की क्षति भी नहीं हुई, आज वर्तमान सत्तारूद्ध पार्टी व उसको समर्थन कर रहे जनप्रतिनिधियों के दबाव में उन्हीं निर्दाेष मुखियाओं को पुरस्कार की जगह जेल की सलाखों के पीछे धकेलने की तैयारियां हो रही हैं।
यदि ऐसा हुआ तो आइंदा वक्त में ऐसे नाजुक व अति-संवेदनशील मौकों पर जब सरकार व प्रशासन को समाज की सबसे अधिक आवश्यकता होगी तब कोई ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा । इसलिए कृपा करके वोटबैंक की राजनीति के चक्कर में जानबूझकर धृतराष्ट्र बनने की कुचेष्टा न करें तथा किसी भी व्यक्ति को बेवजह फंसाने का दुस्साहस नहीं करें, अन्यथा गंभीरतम नतीजे भुगतने पड़ेंगे ।

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Gordhan Soni

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