गंगाशहर , 3 सितंबर। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में ज्ञानशाला दिवस का आयोजन शासनश्री साध्वी श्री शशिरेखा जी एवं साध्वी श्री ललितकला जी के पावन सान्निध्य में शांति निकेतन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शासनश्री साध्वी श्री शशिरेखा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञानशाला एक बहुत बड़ा उपक्रम है, जिसमें संस्कार निर्माण का कार्य होता है । बालक समाज की नींव, परिवार का आधार एवं राष्ट्र का मेरुदंड है। इसमें संस्कारों का बीजारोपण जरूरी है। ज्ञानशाला एक ऐसा उपक्रम है जिसके माध्यम से बचपन में संस्कारों का बीज वपन हो जाए, तो भविष्य में वटवृक्ष का निर्माण निश्चित है। ज्ञानशाला आचार्य श्री तुलसी की अनुपम देन है, जिसे आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने प्रोत्साहित किया तथा वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा उन्हें पल्लवित किया जा रहा है। बच्चों में कुछ करने की क्षमता होती है उन्हें अवसर देने की आवश्यकता है। प्रशिक्षिकाएं अपना समय निकालकर श्रम करती है, उन्हें ज्ञान दान देती है। अभिभावक भी ज्ञानशाला के प्रति बहुत आशान्वित व सक्रिय रहते हैं। जिससे बालकों में संस्कार निर्माण का कार्य निरंतर चलता रहता है। साध्वी श्री ललितकला जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञानशाला का उपक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास का माध्यम बनता है। ज्ञानशाला आचार्य श्री तुलसी की देन है। वे दूरगामी दृष्टि के धनी थे उन्होंने विचार किया कि बच्चों में संस्कार नहीं होंगे, वे उदासीन रहेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि बच्चे संस्कार विहीन हो जाएंगे। उनके मन में पीड़ा थी, समाज के लोगों ने चिंतन किया। मोमासर निवासी पदमचंद पटावरी इस कार्य के लिए आगे आए। ज्ञानशाला के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व का विकास होता है। प्रशिक्षिकाएं बच्चों के लिए मेहनत करती है। माता-पिता का कर्तव्य है की भावी पीढी को संस्कारी किया जाए। वे ज्ञानशाला में भेजकर अपने दायित्व का निर्वहन कर सकते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञानार्थियों द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। प्रशिक्षिकाओं ने सामूहिक गीत प्रस्तुत किया। छोटे-छोटे ज्ञानार्थियों द्वारा प्रस्तुत सामायिक का महत्व नाटिका आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। प्रशिक्षिका रुचि छाजेड़ ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष अमरचंद सोनी, महिला मंडल अध्यक्षा संजू लालानी, तेरापंथ युवक परिषद के सह मंत्री ऋषभ लालानी, ज्ञानार्थी दीपंकर छाजेड़ ने अपने विचार व्यक्त किये। तेरापंथ सभा के मंत्री रतनलाल छलाणी, मनोहरलाल नाहटा, मूलचंद डागा, राजेंद्र सेठिया ने प्रशिक्षिकाओं को सम्मानित किया। तेरापंथी सभा के सहमंत्री पवन छाजेड़ ने आभार ज्ञापन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुनीता पुगलिया ने किया।
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