जैन धर्म की जय-जयकार के साथ मुमुक्षु का गंगाशहर, भीनासर में वरघोड़ा निकला, अभिनन्दन समारोह आयोजित हुआ
बीकानेर । देशनोक निवासी हाल गंगाशहर में 80 वर्ष से रह रहे भूरा परिवार के माणकचन्द भूरा की पुत्री मुमुक्षु मधु भूरा का रविवार को वरघोड़ा निकाला गया एवं भीनासर के नवकार भवन में अभिनन्दन कार्यक्रम आयोजित हुआ। जहां श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ गंगाशहर, भीनासर, महिला मण्डल और युवक मण्डल द्वारा मुमुक्षु बहन मधु भूरा का अभिनन्दन पत्र भेंट कर, मोतियों की माला पहनाकर, भूरा परिवार का शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया गया। युवा संघ के अध्यक्ष महावीर गीडिय़ा ने बताया कि मुमुक्षु मधु भूरा का दिक्षा कार्यक्रम १८ अप्रेल को राजस्थान के कानोड़ में संघ के आचार्य श्री विजयराज जी महाराज के सानिध्य में आयोजित होगा। महावीर गीडिय़ा ने बताया कि इस अवसर पर अभिनन्दन समारोह और वरघोड़े का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ गंगाशहर, भीनासर के अध्यक्ष मेघराज सेठिया ने मायड़ भाषा में अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि ‘आज अपां बहन मधु री दिक्षा लेवण रे अवसर पर भेळा होया हां, दिक्षा लेवणो सोरो काम कोनी, आ खाण्डे री धार है, आग पर चालण रे समान है, मुमुक्षु बहन रे माता-पिता ने धन्यवाद है,जिका आपरे काळजे री कोर ने संघ री सेवा में समर्पित करी है। ई भौतिक युग री दुनिया में जठे टाबर मोबाइल बिना एक मिनट नहीं रह सके, बठे हर तरह रे त्याग री भावना ले परोर भौतिक सुखां ने त्यागण री मिशाल पेश करी है मुमुक्षु मधु भूरा, जिकी ऊंचो मानस राख परोर दिक्षा लेवण रो संकल्प लियो बीरे वास्ते घणो-घणो धन्यवाद है।’ वहीं कार्यक्रम के आरंभ में महिला मंडल की बहनों ने मंंगलाचरण और स्वागत गीत ‘दिक्षा लेवण री आज्ञा दे दी, जिन से मनड़ो नाचे है, गुरु आज्ञा रो पालन करणे संयम पथ पर चली’प्रस्तुत किया। मंत्री भीखमचंद लूणीया ने अपने संबोधन में दिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि दिक्षार्थी को अच्छा सोचना, अच्छा सुनना और अच्छा कर्म करना चाहिए। क्योंकि दिक्षा अनुमोदना यानि कि पुण्य का खजाना है। लूणीया ने कहा कि धन्य है वह माता-पिता जिनके यहां आपका जन्म हुआ। इस अवसर पर उन्होंने भूरा परिवार की जानकारी से सभा को अवगत कराया। वहीं हेम शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि जब कोई अध्यात्मिक साधना करता है, उसकी मनोवृतियां शुद्ध हो जाती है। धर्म संघ को बधाई, जिन्होंने इस तरह के आयोजन कर धर्म को बढ़ावा दिया है। मुमुक्षु बहन के अध्यात्मिक चेतना की उन्नति में बढ़ते रहने की कामना की।
वहीं खारा उद्योग संघ के परविन्द्र सिंह ने मुमुक्षु मधु भूरा को मोतियों की माला देकर अभिनन्दन किया।
मुमुक्षु के पिता माणकचन्द भूरा ने मधु भूरा के धर्म में प्रवृति को लेकर उठते भावों से मुमुक्षु तक के सफर की विस्तारपूर्वक जानकारी सभा में दी। इस अवसर पर सभी श्रावक-श्राविकाओं ने हर्ष-हर्ष, जय-जय के नारों से बहुमान किया।
कार्यक्रम में संगीतकार रामचन्द्र आंचलिया ने मधुर भजन ‘चन्द दिनों का जीवन बंदे, यह दुनिया मकड़ी का जाल, क्यूं डूबा विषयों में पगले, हाल हुआ तेरा बेहाल।’बहन मधु भंसाली ने भजन ‘सिद्धों की आत्मा से मेरा तार जुड़ गया’ और भाई बहनों ने ‘तप त्याग करने, भव सागर तारने, मधु जी संयम धारे’ और श्रावक मोहनलाल झाबक ने भजन ‘आनन्द…आनन्द… है आनन्द, गुरु चरणों में करता मन, मुश्किलें आसान हो, फले सभी अरमान हो’ का संगान किया। कार्यक्रम में मुमुक्षु मधु भूरा को अभिनन्दन पत्र बीकानेर संघ के अध्यक्ष विजयकुमार लोढ़ा, महामंत्री विनोद सेठिया, सुरेन्द्र डागा, गंगाशहर भीनासर संघ के उपाध्यक्ष पवन सोनावत, कोषाध्यक्ष निर्मल सोनावत, युवासंघ अध्यक्ष महावीर गीडिय़ा, गौतम मिन्नी, पारस मिन्नी, कानीराम मिन्नी, लक्ष्मण मिन्नी, प्रकाश सोनावत, जयचन्दलाल सेठिया ने प्रदान किया। वहीं मुमुक्षु के माता-पिता का सम्मान भी किया गया। मुमुक्षु बहन ने अपने भाव भजन ‘चरणों में आई, भावना यह लाई, शीघ्र मुझे संयम लेना है भगवन’के माध्यम से व्यक्त किए। मंच संचालन जयचन्दलाल सुखानी ने किया।
गाजे-बाजे,धर्मध्वजा की जयकारों के साथ निकला वरघोड़ा
हु.शि.उ.चौ. श्री जगनाना, विजय चमकते सूर्य समाना, एक-दो-तीन, चार जैन धर्म की जय-जयकार.., दिक्षार्थी बहन कैसी हो, मधु भूरा जैसी हो…दिक्षार्थी अमर रहे…, अमर रहे…अमर रहे ऐसे और इस प्रकार के अनगिनत धार्मिक नारों और जयकारों के साथ सैंकड़ो श्रावक-श्राविकाओं के साथ रविवार को गंगाशहर मुख्य बाजार स्थित जैन मंदिर से भीनासर स्थित नवकार भवन तक मुमुक्षु मधु भूरा का वरघोड़ा शनिवार को निकाला गया। बैंड बाजों की मधुर स्वर लहरियों के साथ धार्मिक भजनों की प्रस्तुती देते हुए और धर्मध्वजा की जयकारों के साथ निकला वरघोड़े में सफेद कुर्ता पायजामा पहने श्रावक, केसरिया साड़ी पहने श्राविकाऐं मुख्य बाजार गंगाशहर होते हुए गांधी चौक, इन्दिरा चौक से होते हुए भीनासर पटवा हवेली के पास से राम राज्य चौक होते हुए नवकार भवन पहुंचे। इस दौरान रास्ते में वरघोड़े का जगह-जगह स्वागत अभिनंदन किया गया।














