

आचार्य श्री महाश्रमणजी को सादर समर्पित
:: सत्य-अहिंसा रो ज्योतिपुंज ::
युगप्रधान रो आभामंडल, देख इन्द्र बोलें…. ओ तो महातपस्वी ! देव तुल्य देवानंद लागे। मानवता रो उपकारी, ओ तो धवल सेनापति ! संत शिरोमणी लागे ।।
धीर-गंभीर नेमा नंदन, ओ तो प्रज्ञावान! आगम रो महापंडित लागे। यशस्वी तेरापंथ रो गण नायक, ओ तो वात्सल्य मूर्ति ! करुणासागर लागे ।।
भिक्षु तपोवन रो ऋषिराज, ओ तो योगी! समताधारी प्रकाशपुंज लागे। आध्यात्मिकता रो महासूर्य, ओ तो अलख निरंजन ! महाज्ञानी संत लागे ।।
स्वर्ग स्यूं सुरंगों युगपुरुष, ओ तो तुलसी महाप्रज्ञ रो दिवालो न्यारों लागे। सत्य-अहिंसा रो ज्योतिपुंज, ओ तो “मर्यादा आदर्श रो अवतार लागे।।
















