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प्रकृति की रक्षा करना ही मनुष्य की रक्षा करना-सभी धर्म भी ईश्वर और सृष्टि का आदर करना सिखाते हैं

3 जून, श्री गंगानगर, श्री गुरु अर्जुन दास सत्संग भवन के संस्थापक एवं श्री रूद्र हनुमान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुरु अर्जुन दास जी द्वारा सत्संग भवन में रविवार को 591 वा लंगर लगाया गया। लंगर मे शहद युक्त रूहआफजा व मटर युक्त पुलाव प्रसाद वितरण किया गया। समिति द्वारा सेवाएं श्री गुरु अर्जुन दास, हुक्मी देवी, संगठन मंत्री सतपाल,कोर,अनुज मल्होत्रा,पडित नरेश शर्मा, आशा रानी, सुभाष छाबडा,एमडी सतीश, राजरानी, दिया, खुशी, निशा, अभिषेक, कमलजीत भुल्लर, नवनीत मलोट, मिकी ,सुमन, साहिल, देवेंद्र, संजु, यशपाल, पुनम, छिद्र पाल,जगतार सिंह, सिद्धू जस्नकोर, कमलजीत सिंह, विडंग महेंद्र भटेजा, व अन्य सदस्यों द्वारा दी गई। सभी ने तन मन से सेवा दी। श्री गुरु अर्जुन दास जी द्वारा आशीर्वचन में कहा गया कि “हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए। प्रकृति हमें सब कुछ प्रदान करती है। इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया के सभी धर्म भी ईश्वर और सृष्टि का आदर करना सिखाते हैं। सभी धर्मों में माना गया है कि प्रकृति की रक्षा करना ही मनुष्य की रक्षा करना है। प्रकृति की रक्षा करना ही हमारा धर्म है। मानव और प्रकृति के बीच सदियों से घनिष्ठ संबंध रहा है। वह ईश्वर को इस विश्व का सृष्टिकर्ता मानता है। अलग – अलग नामों से उस ईश्वर को संबोधित कर उसकी पूजा – अर्चना भी करता है। कहते हैं कि इस तरह इंसान अपने धर्म का पालन कर रहा है। लेकिन धर्म के पालन का अर्थ केवल परस्पर मानवीय व्यवहार करना , सदाचार और शिष्टाचार के नियमों का पालन करना ही नहीं है। इसका अर्थ तो ईश्वर और सृष्टि के साथ शिष्टाचार निभाना भी है। ईश्वर की आराधना तभी पूरी मानी जाएगी , जब उसके द्वारा रची गई सुंदर सृष्टि व उसमें विचरने वाले सभी प्रकार के जीव – जंतुओं की रक्षा की जाएगी और उनका आदर किया जाएगा। प्रकृति और जीवो की रक्षा के लिए मांसाहार का त्याग करें, पर्यावरण की रक्षा करें, दो पौधे अवश्य लगाए। सत्संग भवन में भी इस दिशा में लगातार कार्य किए जाते रहे हैं।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुरु अर्जुन दास

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दिलीप गुप्ता

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