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वन और वन्यजीव संरक्षण का या कानून बनाने की मांग मुकाम में गूंजी


*समाज का वरिष्ठ प्रतिनिधि मंडल मिलेगा मुख्यमंत्री से*
*अनिश्चितकालीन धरना खेजड़ला की रोही में जारी रहेगा*
*नोखा ।* प्रदेश में पेड़ो की अवैध कटाई और वन्यजीवों का अवैध शिकर की घटनाओं को लेकर बिश्नोई समाज एवं प्रकृति प्रेमी लोग लबें समय से चिंतित थे। सोलर प्लांट लगाने की आड़ में राज्य वृक्ष खेजड़ी की हो रही अंधाधूंध कटाई रोकने के लिए पर्यावरण संघर्ष समिति का घटना पर गत 28 जुलाई से जिले के गांव खेजड़ला की रोही में अनिश्चित कालीन धरना शुरू किया गया था। उक्त आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भावी रूप रेखा तैयार करने की योजना में अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा एवं पर्यावरण संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वाधान में निकटवर्ती ग्राम मुक्तिधाम मुकाम में एक आम सभा आहूत की गई। जिसमें राजस्थान के 10 जिलों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
मुकाम पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी रामान्दन जी महाराज सहित संतो के सानिध्य में आम सभा ने चार घंटो तक चिंतन मंथन किया। समारोह की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र बूड़िया ने की। श्री जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था राज. के अध्यक्ष रामरतन बिश्नोई ने आम सभा की भूमिका बनाते हुए बिश्नोई समाज द्वारा प्रकृति बचाने के लिए किए गये बलिदानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 539 वर्ष पहले राजस्थान रेगिस्थान था तब बिश्नोई धर्म के संस्थापक गुरू जम्भेश्वर भगवान ने वनस्पति को सजीव बताया उन्होंने वृक्ष नहीं काटना और वन्य जीवों की सुरक्षा करना मानव धर्म बताया। जाम्भौजी की बात को अंगिकार करते हुए बिश्नोई धर्म के अनुयाईयों ने खेजड़ी को बचाने के लिए चार बार बलिदान दिये थे जिसमें चौथा बलिदान अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में विक्रम सम्वत 1787 में हुआ था …

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Gordhan Soni

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