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“नहीं रहे रंगमंच के सुल्तान बल्बन” प्रदेश के प्रख्यात रंगकर्मी ओम सोनी का शनिवार को लम्बी बीमारी के चलते निधन

“नहीं रहे रंगमंच के सुल्तान बल्बन”
प्रदेश के प्रख्यात रंगकर्मी ओम सोनी का शनिवार को लम्बी बीमारी के चलते निधन हो गया। 74 वर्षीय ओम सोनी पिछले आठ माह से अस्वस्थ थे। अंतिम संस्कार आज सुबह ग्यारह बजे चौखूँटी स्थित मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के मुक्तिधाम में किया जाएगा।

रंगन नाट्य संस्था से जुड़े ओम सोनी ने हिन्दी व राजस्थानी नाटकों में गुणवत्ता के अभिनय के साथ अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी। चाहिए, चौराए रो कुँओं, गुलाम बादशाह, गिनीपिग, संध्या छाया, ओळमो, सिंहासन खाली है, जी हुजूर, उलझी आकृतियां, धूर्त समागम, ढोंग, वल्लभपुर की रूप कथा, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, इस रास्ते ने नाम, किसी और का सपना, भूखे नाविक, किमीदम यक्षम, खामोश अदालत जारी है, बीच बहस में आदि नाटकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले ओम सोनी ने भूमि पुत्र, महाराणा प्रताप, आसमां छू आएं और पूरक जैसे हिन्दी धारावाहिकों में भी शानदार अभिनय किया। वर्ष 1995 में तत्कालीन अधूरे रंगमंच पर मंचित हुए डॉक्टर नंदकिशोर आचार्य के बहुचर्चित नाटक गुलाम बादशाह में सुल्तान बल्बन का किरदार उनके रंग जीवन को और अधिक समृद्ध करने वाला साबित हुआ।

बीकानेर में एक आधुनिक सुविधा वाले तथा रंगमंचीय आवश्यकताओं वाले प्रेक्षागृह की महत्ती मांग को लेकर ओम सोनी ने रंगमंच अभियान समिति के संयोजक रहते हुए लम्बा संघर्ष किया जिसके चलते यहाँ रविन्द्र रंगमंच का निर्माण हुआ। इस अभियान में उनके संघर्ष को सृजन जगत हमेशा याद करेगा।

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दिलीप गुप्ता

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