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मुफ्त, मुफ्त , मुफ्त —- लोक लुभावन वायदे वादा तेरा वादा, वादे पे मारा गया मतदाता !
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✍️_ वरिष्ठ पत्रकार मनोहर चावला की कलम से

सरकार बनाने के लिए राजनैतिक दलो के नेता चुनाव के समय मतदाताओं से वोट लेने के लिए बहुत से वादे करते है। फिर चुनाव जीतने के बाद वे अपने किये गये वादे भूल जाते है। फिर अगले चुनाव में अपनी भूल मानते हुवे मतदाताओं से फिर वादे करते है। फिर जीतने के बाद वादे भूल जाते है। हम राष्ट्रीय स्तर पर मोदी जी की बात नहीं कर रहे कि उन्होंने चुनाव के समय कहा था कि हमारी सरकार बनने पर किसानो के कर्जे माफ कर देंगे। विदेशों में भ्रष्ट्र राजनेताओं के जमा बेशुमार धन को वापिस भारत लाएंगे। प्रत्येक मतदाता के खाते में १५-१५ लाख रु. जमा करवाएगे। यह सब बड़े लोगो की बड़ी बाते थी, जो आज तक पूरी नहीं हुई। हम तो बात करेगे अपने बीकानेर की— जो एक सर्वे में स्वच्छता में प्रदेश में दूसरे स्थान पर आया है, के समाचार पर हमे यह लिखने को विवश कर दिया कि यह सरासर झूठ है जनता को भ्रम में डालना है। आश्चर्य है नरक बनता बीकानेर स्वच्छता और सौंदर्य की क्षेणी में प्रदेश में दूसरे स्थान पर रखा गया है। हमारा तो इतना ही कहना है कि एक बारी- सिर्फ एक बार आप बीकानेर आकर कोटगेट के अन्दर , शहर के भीतरी भाग में, सब्जी मण्डी, फड़ बाज़ार, जूनागढ़ के आगे पीछे, पवनपुरी, जयनारायण व्यास कालोनी या फिर पूरे बीकानेर की सड़को का, नलियों का, गटरो का , खड्डों का निरीक्षण कर लीजिए जहाँ जगह जगह कचड़े के ढेर मिलेगे, कोई भी आपको ऐसा मार्ग नहीं मिलेगा, जहाँ गंदगी के ढेर न हो ( सिविल लाइन को छोड़कर) जगह जगह नाले खुले मिलेगे, सड़को पर बहता गंदा पानी मिलेगा। बंद एसी कमरों में बैठकर आंकड़ों का खेल दिखाकर बीकानेर को प्रदेश में स्वच्छता की दूसरी क्षेणी में रखा गया है। बीकानेर की जनता के साथ बहुत बड़ा मजाक किया गया है। वैसे भी बीकानेर की जनता चुनाव के समय चुपड़ी- चिपड़ी मीठी बातो में आकर मूर्ख बन जाती है। बीकानेर के राजनेता यहाँ की भोली- भाली और मासूम जनता की कमज़ोरी जानते है उनकी मासूमियत का फायदा यहाँ के राजनेता उनसे वायदे करके उठाते है और वो वायदे कभी पूरे नहीं करते? डॉ. बी . डी. कल्ला २५ सालों तक बीकानेर का प्रतिनिधितिव करते रहे, रेल फाटको को हटाने और बायपास बनाने के लिए वायदे करते रहे लेकिन कभी पूरे नहीं किए! गोपाल जोशी और नंदू महाराज ने भी ऐसे वायदे किये थे वो भी वायदा नहीं निभा सके। अर्जुन मेघवाल जी से हमने पहले चुनाव में ही उनसे पूछा था कि बीकानेर की जनता ने आपको वोट दिया और आप जीत गये तो आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी? उनका कहना था कि सबसे पहले मैं रेल फटको की समस्या का निदान करूँगा। लेकिन तीन चुनाव जीतने और केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी वह अपना वादा नहीं निभा सके। दिन में ५६ बार बंद होते रेल फाटको से बीकानेर के लोगो का जीवन ठहर सा गया है। थम सा गया है। एक शक्स पुर्व विधायक रामकिशन दास गुप्ता ने एक साल से ज़्यादा समय तक रेल फाटको की समस्या समाधान के लिये कोटगेट पर धरना
दिया,अनशन किया तब कही जाकर तत्कालीन रेलमन्त्री ज़ाफ़र शरीफ को बीकानेर आना पड़ा और वस्तु स्थिति से वाक़िफ़ होकर बाइपास की मंज़ूरी उन्होंने दी। लेकिन उनकी मंज़ूरी ठण्डे बस्ते में चली गई। रेल मंत्री के वायदे को न रेल अधिकारियों ने माना, न भैरोसिंह शेखावत सरकार ने, न वसुंधरा जी ने, और न ही अशोक गहलोत ने उनका वायदा पूरा किया। वादा तेरा वादा ही रहा। अब अपनी विधायिका से तो कोई उम्मीद है नहीं ! देखना है क्या विधायक जेठानंद व्यास जी अपना वायदा निभाते है? यहाँ की जनता को यह समझ में नहीं आता कि अर्जुन मेघवाल जी केन्द्रीय कानून मंत्री है। प्रधानमंत्री मोदी जी के काफ़ी नज़दीक है वो इस समस्या का निदान क्यो नहीं करवाते ?वो चाहते तो मोदी जी और रेल मंत्री जो पिछले दिनों बीकानेर आए थे उन्हें साथ लेकर रेल फाटको के स्थल पर लाते। लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए। जनता को किया गया वायदा वो भी भूल गये। इसलिये अब जगह जगह यही चर्चा है कि वादा है वादों का क्या? पर इन वादों में मारा गया बेचारा मतदाता!

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दिलीप गुप्ता

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