विभिन्न तपस्याओं की अनुमोदना
शाश्वत सुख के लक्ष्य को प्राप्ति का लक्ष्य रखें-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा.
बीकानेर, 13 अगस्त। गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि के सान्निध्य बुधवार को कन्हैयालाल भुगड़ी के चौविहार (बिना अन्न जल) के 48 दिन की तपस्या तथा ’’दादा दत्त सूरी’’ ’ व सिद्धि तप, अक्षय निधि तप के तपस्वियों की अनुमोदना की गई।
सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट, अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई की ओर से सकल श्रीसंघ के सहयोग से आयोजित चातुर्मास में
दत सूरी तप, का समापन शुक्रवार 15 अगस्त को, जैन समाज के प्रमुख आगम कल्पसूत्र पर क्विज प्रतियोगिता के बाद होगा। कन्हैयालाल भुगड़ी सहित सभी तपस्वियों का अभिनंदन 17 अगस्त होगा ।
अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई उपाध्यक्ष कमल सेठिया ने बताया कि अक्षय निधि तप में तपस्वी 15 दिन एकासना तथा संवत्सरि के दिन उपवास रखेंगे। अक्षय निधि तप के साथ अनेक श्राविकाएं समोशरण, विजय कषाय तप कर रही है। सिद्धि तप की साधिका किरण देवी बुच्चा व कोमल नाहटा ने 7 की लड़ी की तपस्या चल रही है। दादा दत सूरी तप में तपस्वियों ने 36 उपवास 7 पारणें किए है। तप के समापन पर ढढ्ढा कोटड़ी से दादा की प्रतिमा को गाजे बाजे से लाभाथी गुलाब चंद फतेहचंद खजांची के निवास पर ले जाया जाएगा।
प्रवचन- गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने बुधवार को ढढ्ढा कोटड़ी में प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर के शासन, संदेश व आदर्शों से प्रेरणा लेकर शाश्वत सुख के लक्ष्य को प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ व प्रयास करने चाहिए। भगवान के शासन में आराधना करने का लक्ष्य जरूरी है । बिना लक्ष्य के जीवन का कोई अर्थ नहीं है। लक्ष्य से ही जीवन सार्थक बनता है। लक्ष्य हमारा एक ही होना चाहिए दीर्ध कालीन सुखी बनना। किसी भव में जो सुख मिले तो वह उस भव में प्रायः 60-65 वर्ष तक रहता है। अगले भव में पुनः सुख मिले इसकी गारंटी नहीं है। इस प्रकार सुख-दुख के चक्कर में अधिकांशतः दुख ही प्राप्त करते है। हमें शाश्वत सुख प्राप्ति के लक्ष्य को लेकर साधना, आराधना व देव, गुरु व धर्म की भक्ति करनी चाहिए।













