
बीकानेर। बीकानेर तेरापंथ भवन में विराजित आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञानुवतिशिष्या शासन श्री साध्वी मंजू प्रभा जी एवं शासन श्री साध्वी कुंथु श्री जी की मंगल सन्निधि में लोगस्स का मंगलकारी अनुष्ठान सानंद संपन्न हुआ l साध्वी श्री मंजू प्रभा जी ने फरमाया पर्यूषण पर्व का समय निकट आ गया है श्रावक श्राविका समाज को जागरूकता का परिचय देना है और अधिक से अधिक आत्मजागरण की ओर अग्रसर होना है l
साध्वी कुंथु श्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा स्रोत, स्तुति, स्तवन इन सब का मूल रूप है भक्ति ।
लोगस्स का पाठ देव, गुरु, धर्म के प्रति एक अनुराग का प्रयोग है इसमें 24 तीर्थंकरों की स्तुति की गई है l भगवान ऋषभ से लेकर भगवान महावीर तक के सभी तीर्थंकरों को भक्ति पूर्वक एक बार भी नमस्कार किया जाए तो चाहे वह पुरुष हो या नारी वह नमस्कार उसे संसार से पार उतारने वाला होता हैं l लोगस्स की स्तुति छोटी होने पर भी भावपूर्ण और महत्वपूर्ण है l लोगस्स आज के युग का कल्पवृक्ष है। कलयुग का चिंतामणि है। आत्म शुद्धि के साथ अन्य विघ्न को दूर करता है। भक्ति पूर्वक किया गया स्मरण चेतना के कण-कण को प्रभावित करता है ।जब भक्ति तन्मयता, एकाग्रता तल्लीनता से की जाए तो वह कर्म श्रृंखला को तोड़ने का माध्यम बनती है लोगस्स के कई छोटे-छोटे प्रयोग बताए गए हैं l जिसे वह आवेश पर नियंत्रण करना है वह चंदेसु निम्मलयरा ज्योतिकेंद्र पर सफेद रंग का ध्यान करें l इससे पिनियल ग्रंथि का स्त्राव बदल जाता है l सिर दर्द, आवेश, आवेग सब शांत हो जाते हैं l लोगस्स का पाठ कंठस्थ व उच्चारण भी शुद्ध होना चाहिए। साध्वी गुरुयशा जी, साध्वी सुमंगला श्रीजी, साध्वी सुलभ यशा जी,जयंत प्रभा जी आदि सभी साध्वियों ने अनेक मंत्रों के साथ लोगस्स का विधिवत उच्चारण एवं प्रयोग किए l श्रावकों ने भी सामूहिक स्वर में स्वर मिलाया l एकाग्रता के साथ सबने प्रयोग किया। कार्यक्रम में उपस्थिति उल्लेखनीय रही l













