


सामायिक आत्मशुद्धि का सोपान
बीकानेर। तेरापंथ भवन बीकानेर में विराजित आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री द्वय साध्वी मंजू प्रभा जी एवं साध्वी कुंथु श्री जी के सानिध्य में पर्युषण पर्व का तृतीय दिवस सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया l साध्वी कुंथु श्री जी ने कहा भगवान महावीर से पूछा गया भंते सामायिक क्या है समाहित करते हुए भगवान ने फरमाया सामायिक का अर्थ है आत्मा में रहना, अपनी आत्मा में स्थित होने का अभ्यास करना, समता का नाम सामायिक है सामायिक में 32 दोषों का वर्जन करना चाहिए l 10 मन के 10 वचन के 12 काया के इन दोषों से दूर रहकर की जाने वाली सामायिक शुद्ध है l सामायिक करना प्रत्येक श्रावक का पुनीत कर्तव्य है l साधना के क्षेत्र में सर्वाधिक मूल्य समता का है भगवान ने समता को धर्म बताया है,इससे भाव शुद्ध चित समाधि कषाय की मंदता, मन की एकाग्रता, तनाव मुक्ति कर्मजा शक्ति का विकास होता है l
साध्वी श्री जी ने हाजिरी का वाचन किया l भगवान महावीर की जीवनी के अंतर्गत मरीचि के भव का वर्णन बताते हुए उसने कैसे कुल का मद किया और किस प्रकार कर्मों का बंधन किया सबका विस्तार से वर्णन किया तथा मद के आठ स्थान बताकर उसका बंधन कैसे, किस-किस जीव ने किया सप्रसंग पर प्रकाश डाला l
साध्वी मंजू लता जी ने सामायिक दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए l सामायिक में कौन सी बातों का जागरूकता से पालन करना चाहिए तथा वेशभूषा उसकी सादगी के बारे में जानकारी दी l सामायिक ही समता की साधना है इस प्रकार सामायिक के महत्व को बताया साध्वी सुमंगला श्री जी ने अभिनव सामायिक का प्रयोग करवाया l सभा अध्यक्ष सुरपत जी बोथरा ने श्रावक निष्ठा पत्रिका वाचन किया l













