
वैदिक सरस्वती नदी शोध पुरोधा अलंकरण श्री दामोदर दास मोहता को मरणोपरांत समर्पित
बीकानेर। वैदिक सरस्वती नदी शोध यात्रा के चार दशक की पूर्णाहुति पर आज श्री मोहता ट्रस्ट के स्व. दामोदर दास जी मोहता को मरणोपरांत सरस्वती नदी शोध पुरोधा अलंकरण समर्पित किया गया। रातीघाटी समिति के उपाध्यक्ष गोपाल सिंह शेखावत एवं श्री प्रदीप सिंह चौहान, महामंत्री श्री ओम नारायण श्रीमाली, मंत्री भंवर सिंह बीका, भगवान सारण, सहमंत्री तेजमाल सिंह टांट, कोषाध्यक्ष छत्रसेन सुथार ने स्व. दामोदर दास जी के सुपुत्र श्री शशिकुमार मोहता, ट्रस्टी श्री मोहता ट्रस्ट को शाल, उपरणा, श्रीफल, अभिनंदन पत्र और रातीघाटी उपन्यास भेंट कर सम्मानित किया।
साथ ही कोलकाता से पधारे ट्रस्ट्री श्री नील रतन मोहता का भाव भीन स्वागत किया गया ।
इस अवसर पर समिति के संस्थापक महामंत्री शिक्षाविद जानकी नारायण श्रीमाली ने स्व. दामोदर दास जी के महत्वपूर्ण योगदान तथा श्री मोहता ट्रस्ट के लोकहितैषी कार्यों को मरुधरा का गौरव निरूपित किया।
भारतीय इतिहास संकलन समिति के अध्यक्ष डॉ. रामगोपाल शर्मा ने कहा कि सरस्वती नदी की शोध से वैदिक सभ्यता को विश्व ने प्राचीनतम स्वीकार किया।
श्री शशिकुमार जी और मोहता ट्रस्ट की और से आभार ज्ञापित करते हुए वैद्य श्री राजेंद्र गर्ग ने ट्रस्ट के सेवाकार्यों पर प्रकाश डाला। इस समारोह में मोहता ट्रस्ट के श्री निखिल मोहता और जया रामपुरिया ने समिति पदाधिकारियों का स्वागत किया ।
वैद्य राजेंद्र गर्ग ने ट्रस्ट की और से आभार व्यक्त किया













