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भारत में अश्व-क्षेत्र के विकास पर कार्यशाला का आयोजन, स्वदेशी घोड़ों की स्पर्धाओं के लिए राष्ट्रीय खेल निति बने :डॉ. मेहता
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भारत में अश्व-क्षेत्र के विकास पर कार्यशाला का आयोजन

स्वदेशी घोड़ों की स्पर्धाओं के लिए राष्ट्रीय खेल निति बने :डॉ. मेहता

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र , बीकानेर पर “भारत में अश्व-क्षेत्र के विकास पर कार्यशाला” का आयोजन किया गया। इस आयोजन की शुरुआत गोंडल, गुजरात से पधारे माँ भुवनेश्वरी पीठ केआचार्य श्री घनश्याम जी के आशीर्वचनों एवं माँ सरस्वती के दिप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉरामेश्वर सिंह, माननीय कुलपति, गुरु काशी विश्वविद्यालय, भटिण्डा थे एवं विशिष्ट अतिथि डॉ देवेंद्र स्वरूप, पूर्व निदेशक, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, डॉ कानन कुलसेकर, तनुवास, चेन्नई एवं डॉ श्रीनिवास, नार्म, हैदराबाद से थे। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन देते हुए डॉ टी के भट्टाचार्य, निदेशक ने केंद्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला एवं स्वदेशी एस.एन.पी. चिप, घोड़ों की आठवीं नस्ल, होल जीनोम कार्यक्रम, भ्रूण प्रत्यर्पण एवं विट्रीफिकेशन तकनीक आदि केंद्र द्वारा विकसित किए जाने की जानकारी दी एवं वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने केंद्र द्वारा विक्सित किए गए वैक्सीन्स एवं डायग्नोस्टिक किट्स की जानकारी भी दी।

कार्यशाला के आयोजन सचिव एवं प्रभागाध्यक्ष डॉ एस सी मेहता ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला एवं भारत में अश्व क्षेत्र के भविष्य की रूप रेखा पर अपना प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा की देश में तीन लाख चालीस हजार घोड़े हैं उनमें से मात्र दस हजार के आस-पास घोड़े विदेशी हैं लेकिन उनके लिए रेस कोर्सेस हैं, क्लब्स हैं एवं अन्य कई सुविधाएं देश में हैं लेकिन स्वदेशी तीन लाख तीस हजार घोड़ों के लिए कुछ नहीं। उन्होंने बताया की आज आवश्यकता है हमें इन स्वदेशी घोड़ों को बढ़ावा देने की एवं उसके लिए उन्होंने हॉर्स सफारी,राईडिंग स्कूल्स, रेड़ी रेस, तांगा रेस, रेवाल चाल, ड्रेसाज, ईंडूरेंस रेस, एरीना पोलो आदि घोड़ों पर आधारित स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने की बात दी जो कि हमारे स्वदेशी घोड़ों के अनुरूप है एवं हमारा घोड़ा इस स्पर्धाओं में बहुत आगे जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया की कई जगह कानून की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से भी कई बाधाएं आती है, जैसे रेड़ी रेस या तांगा रेस करावा सकते हैं या नहीं। उन्होंने इस बात पर बल दिया की जब जल्लिकट्टु भी उचित नियमों के पालन के साथ खेला जा सकता है तो रेडी रेस क्यों नहीं। लेकिन उन्होंने इस बात पर विशेष जोर देते हुए कहा की जब तक राष्ट्रिय खेल निति में स्वदेशी घोड़ों के स्पोर्ट्स को राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन की रूप रेखा नहीं बनती है एवं मान्यता नहीं मिलती है तब तक यह कार्य अधूरा ही रहेगा। उन्होंने निति निर्धारकों से अपील की इस सम्बन्ध में आगे की कार्यवाही जनहित में प्रारम्भ करें। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आलइंडिया भीमथड़ी हॉर्स एसोसिएशन, बारामती, पुणे के संस्थपाक अध्यक्ष श्री रणजीत डी पंवार ने कहा की हमने डॉ मेहता के साथ मिल कर करीब तीन सौ वर्ष पूर्व की विरासत को पुनः संभाला है एवं उसे भीमथड़ी नस्ल के रूप में मान्यता प्रदान करवाई है। हमने उसको डीएनए के स्तर पर भी सिद्ध किया है। अब हम उसके सतत विकास की रूपरेखा पर कार्य कर रहे हैं एवं पिछले दो वर्षों में लगातार दो शो करवाए हैं एवं उनकी स्पोर्ट्स क्षमताओं के विकास पर कार्य कर रहें हैं। इसके लिए हमने “ब्रिटिश पोनी क्लब” के साथ भी टाईअप किया है। अब यह नस्ल रिलायंस के “वन-तारा” में भी संरक्षित रहेगी।

कार्यक्रम में आल इंडिया मारवाड़ी एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गजेंद्र पालसिंह पोसाणा ने दिल्ली में होने वाले स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर स्वदेशी घोड़ों की एक टुकड़ी को सम्मिलित करने की बात कही। उन्होंने इस पर भी बल दिया की हमारे घोड़ों के अनुरूप जो सैडलरी आइटम्स हैं उन्हें सुरक्षित किया जाय एवं प्रदर्शित भी किया जाय। उन्होंने बताय की हमारे पास मारवाड़ी घोड़े का बेस्ट जीन पूल है लकिन कई बार हम इनकी बिमारियों के विशेषज्ञों की कमी से एवं रोग निदान केंद्रों की कमी से झूंझते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि अश्व बाहुल्य क्षेत्रों में कम से कम इनका सैंपल कलेक्शन सेंटर तो बनाना ही चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की वैक्सीन भी कुछ कम कीमत में मिलनी चाहिए। कार्यक्रम में इंडिजीनस हॉर्स सोसिटी के वाईस प्रेजिडेंट श्री रघुवेन्द्रसिंह डूंडलोद ने कहा कि हमारे घोड़े सफ़ारी के लिए विश्वस्तरीय है, उन्होंने घोड़ों में एंटी डोपिंग टेस्ट की आवश्यकता पर बल दिया एवं कहा कि हर हॉर्स शो राष्ट्रीय नहीं हो सकता, इसके लिए प्रोपर फॉर्मेट एवं मान्यता की आवश्यकता है। पंजाब से आए कर्नल सर प्रताप सिंह ने कहा कि ग्लैंडर्स की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री अनंत सिंह राठौर, केलवा ने कहा कि हमारा घोड़ा कई सारी स्वदेशी स्पर्धाओं में बेहतरीन है एवं हमारे कुंवर राजयवर्धन ने स्वयं ड्रेसाज में मारवाड़ी घोड़े का तुलनात्मक अध्ययन विदेशी घोड़ों से किया है एवं यह सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हुआ है। उन्होंने इसके ईंडूरेंस रेस में प्रथम आने का जिक्र भी किया। कार्यक्रम में काठियावाड़ी हॉर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी श्री राजेश भाई जड़ेजा ने काठियावाड़ी घोड़ों पर विशेष ध्यान देने की जरुरत पर बल दिया उन्होंने कहा की शुद्ध काठियावाड़ी घोड़ों की संख्या बहुत कम हो गई है एवं तुरन्त इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह समाप्त हो जाएगा। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मारवाड़ी हॉर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीआशीष भाई अमिन ने कहा की यह बहुत ख़ुशी की बात है की हमने जो बात पिछली बैठक में कही थी आज उस पर एक आम राय बन रही है एवं डॉ मेहता ने उसी दिशा में आज की कार्यशाला का आयोजन किया है। उन्होंने मारवाड़ी घोड़े के प्रजनन क्षेत्र में गुजरात के पाटण एवं बनासकांठा का नाम उल्लेखित किए जाने पर बल दिया एवं कहा की यह दोनों क्षेत्र पूर्व मालाणी क्षेत्र के अंग रहे है जहाँ से मारवाड़ी घोडा आया है। कार्यशाला में पूना से श्री केशव जोशी एवं सचिन जगताप ने भी भीमथड़ी घोड़े को आगे बढ़ने की बात कही। कार्यक्रम में हलारी ब्रीडर्स मालधारी ट्रस्ट के श्री गोकर भाई भारवाड़ ने हिस्सा लिया एवं सहजीवन संस्थान, भुज गुजरात से श्री नरेंद्र ने भाग लिया एवं हलारी में ब्रीडिंग नर अश्वों की कमी को दूर करने एवं अचानक मृत्यु को रोकने पर बल दिया। कार्यक्रम में अहमदाबाद के श्री केतन एवं कहन पटेल ने भी भाग लिया एवं स्वदेशी घोड़ों के स्पोर्ट्स पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में पंजाब से आये डॉ गुलविंदर एवं संदीप ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सञ्चालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रत्नप्रभा ने किया एवं इसमें हिसार से आए डॉ नितिन विरमानी, संजय एवं राजेश कुमार वैद, ब्रह्म प्रकाश, दिनेश शर्मा एवं बीकानेर से डॉ लेघा, रमेश देदर, टी राव ताल्लुरी, कुट्टी, जितेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, गोपाल, राजेंद्र, सत्यनारायण, महेंद्र सिंह, करण, सुहैब, अमित, राहुल एवं अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में केन्द्र के समस्त अधिकारियों एवंकर्मचारियों की सहभागिता रही।

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