जोधपुर/बीकानेर।
लंबे समय से चल रही विचार-विमर्श और शास्त्र चर्चा के बाद पुष्करणा समाज की ऐतिहासिक और समर्पित परंपरा सामूहिक सावा, जिसे आज “पुष्करणा ओलंपिक” के नाम से भी जाना जाता है, की अगली तिथि की घोषणा कर दी गई है। आगामी सामूहिक सावा का आयोजन 10 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
इस बार सावा का नाम “चंद्रशेखर संग उमा” रखा गया है, जो समाज में एक प्रतीकात्मक दंपति के रूप में सावा की गरिमा और परंपरा को दर्शाता है।
धनतेरस को होगी सम्पूर्ण तिथियों की घोषणा
रमक झमक संस्था की ओर से यह जानकारी दी गई कि सभी विवाह-संबंधी अन्य पूजन व मुहूर्त की सम्पूर्ण तिथियों की घोषणा आगामी धनतेरस पर की जाएगी। यह एक बार फिर पुष्करणा समाज को एकसूत्र में बांधने और सावा संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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सभी समाजबंधुओं से अनुरोध
पुष्करणा समाज के सभी बंधुओं से निवेदन किया गया है कि यदि आपने अपने बच्चों की शादी अगले 6-8 महीनों में करने की योजना बनाई है, तो कृपया इसी सामूहिक सावा (पुष्करणा ओलंपिक) में सम्मिलित करें। यह न केवल आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से हितकारी है, बल्कि परंपराओं की पुनर्स्थापना और सामूहिक एकता का भी प्रतीक है।
पूर्वजों की परंपरा, आज का दायित्व
मरु समीक्षा न्यूज़ बीकानेर
सामूहिक सावे की इस अनूठी परंपरा को हमारे पूर्वजों ने स्थापित किया था, जिसका उद्देश्य समाज में एकता, समानता और पारिवारिक सहयोग को बढ़ावा देना था। आज, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस परंपरा को आगे बढ़ाएं और नई पीढ़ी को इसकी गरिमा से परिचित कराएं।
समाज के प्रतिष्ठित पदाधिकारियों, संस्थाओं, और सावे से जुड़ी समितियों से भी अपील की गई है कि वे सक्रिय भागीदारी करें और इस आयोजन को एक नई ऊँचाई तक पहुँचाएँ।
बीकानेर लाईव न्यूज़ रिपोर्टर दाऊ लाल कल्ला



























