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फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) में बेहतर निवेश का निर्णय-ज़रूरी बातें जो हर जमाकर्ता को जाननी चाहिए….
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✍️सीए सुधीश शर्मा ,

समझदार FD निवेशक के लिए चेकलिस्टकुछ ज़रूरी बातें जो हर जमाकर्ता को जाननी चाहिए ताकि फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) में बेहतर निवेश का निर्णय लिया जा सके।

पूंजी की सुरक्षा÷

फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) आज भी लोगों की सबसे पसंदीदा निवेश योजनाओं में से एक है, क्योंकि इसमें ब्याज से नियमित आमदनी होती है और पैसा भी सुरक्षित रहता है।
हालाँकि, पूंजी कितनी सुरक्षित है, यह इस पर निर्भर करता है कि आपने किस बैंक या वित्तीय संस्था में FD कराई है। ब्याज दरें भी FD की अवधि, ब्याज भुगतान का तरीका और नवीनीकरण विकल्प पर निर्भर करती हैं।

भारत में बैंक FD को “डिपॉज़िट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC)” सुरक्षा देती है — यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की एक सहायक संस्था है। इस योजना के तहत, अगर बैंक बंद हो जाए तो हर जमाकर्ता को उस बैंक में जमा उसकी कुल राशि (बचत खाता, FD, रिकरिंग डिपॉज़िट, चालू खाता आदि) का अधिकतम ₹5 लाख तक सुरक्षा मिलती है।
यह सुरक्षा देश के लगभग सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक तथा सहकारी बैंक (सिवाय प्राथमिक सहकारी समितियों के) को मिलती है।
ध्यान दें — NBFC में की गई FD इस बीमा योजना के तहत नहीं आती।

ब्याज दरें

FD की ब्याज दरें हर बैंक और NBFC में अलग-अलग होती हैं। आम तौर पर छोटे फाइनेंस बैंक बड़ी सरकारी या निजी बैंकों से 1% से 1.5% तक ज़्यादा ब्याज देते हैं।
क्योंकि छोटे फाइनेंस बैंक भी DICGC बीमा योजना के तहत आते हैं, इसलिए यदि आप ज़्यादा ब्याज के साथ सुरक्षा भी चाहते हैं, तो ₹5 लाख तक की FD कई अलग-अलग बैंकों में बाँटकर रख सकते हैं।

सही अवधि (Tenure)

FD की अवधि तय करते समय यह सोचें कि आपको अपने पैसे की ज़रूरत कब पड़ सकती है और आपके वित्तीय लक्ष्य कितने लंबे हैं।
अगर आप यह नहीं सोचेंगे, तो बीच में पैसों की ज़रूरत पड़ने पर FD तोड़नी पड़ सकती है — जिससे आपको 1% तक का ब्याज नुकसान (पेनल्टी) हो सकता है। यह दर उस ब्याज दर से कम होती है जो उस समयावधि के लिए बैंक ने तय की होती है।
इसलिए FD की अवधि तय करते समय ब्याज दर की प्रवृत्ति और FD स्लैब को भी ध्यान में रखें।

ब्याज भुगतान के विकल्प

FD दो तरह की होती है —
1. नॉन-क्यूम्यूलेटिव FD – इसमें ब्याज तय अंतराल पर मिलता है, जैसे हर महीने या हर तीन महीने में।
2. क्यूम्यूलेटिव FD – इसमें ब्याज जोड़ दिया जाता है और उसी पर दोबारा ब्याज मिलता है, यानी “ब्याज पर ब्याज” का लाभ।
कुछ बैंक छःमाही या वार्षिक ब्याज भुगतान विकल्प भी देते हैं।

नवीनीकरण विकल्प (Renewal Option)

ज्यादातर बैंक FD खोलते समय “ऑटो-रिन्यूअल” का विकल्प देते हैं।
अगर यह चुना जाए, तो FD के परिपक्व (mature) होने पर आपकी मूल राशि और ब्याज, दोनों फिर से नई FD में निवेश हो जाते हैं — उसी अवधि के लिए, लेकिन उस समय की लागू ब्याज दर पर।
अगर आप यह विकल्प नहीं चुनते हैं, तो FD की पूरी रकम आपके बचत या चालू खाते में सीधे जमा हो जाती है।

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दिलीप गुप्ता

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