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खुशहाल जीवन के लिए ध्यान’’ विषयक तीन दिवसीय आध्यात्मिक संपन्न,माता-पिता व परमात्मा ही सच्चे उपकारी व सहयोगी-डॉ.शक्ति राज भाई
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खुशहाल जीवन के लिए ध्यान’’ विषयक तीन दिवसीय आध्यात्मिक संपन्न

माता-पिता व परमात्मा ही सच्चे उपकारी व सहयोगी-डॉ.शक्ति राज भाई

बीकानेर, 17 दिसम्बर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संभागीय केन्द्र बीकानेर की ओर से रविन्द्र रंगमंच पर आयोजित तीन दिवसीय ’’खुशहाल जीवन के लिए ध्यान’’ बौद्धिक व प्रायोगिक विशेष आध्यात्मिक उत्सव बुधवार को संपन्न हुआ। अनेक श्रोताओं ने आंखों में अश्रुधारा बहाते हुए जाने-अनजाने में हुई गलतियों, मन, वचन व कर्म से किए गए पापों के लिए आत्म व परमात्मा से क्षमा मांग कर आईन्दा किसी को दुःख व तकलीफ नहीं देने का संकल्प लिया।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता, लाइफ कोच डॉ.शक्तिराज भाई ने अंतिम सत्र में बड़ी संख्या में लोगों को आत्म से परमात्म प्राप्ति की भाव यात्रा करवाई। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के कर्म, पाप व पुण्य तथा संस्कार साथ चलते है। अनेक पापों व पुण्यों गठरी अनेक जन्मों तक आत्मा के साथ चलती है। काम,क्रोध, लोभ व मोह तथा पापों की कालिमा आदि कषायों के कारण निर्मल, पवित्र आत्म अपने असली स्वरूप् में प्रकट नहीं होती । आत्मा के असली स्वरूप को पहचाने के लिए एकाग्रचित होकर राजयोग का ध्यान करें। किसी का दिल नहीं दुखाएं, कष्ट नहीं दें। भूलवश, ईर्ष्या, विकार, राग व द्वेष व अन्य कारणों से किसी को दुख व तकलीफ दी हो तो उससे क्षमा याचना कर लें।
डॉ.शक्तिराज भाई ने कहा कि प्रत्येक पाप कर्म का हिसाब जन्म जन्मान्तर तक चुकाना पड़ता ही है। अहंकार, क्रोध व पापों, दूसरों की बद दुवाओं से जीवन में अनेक अशोभनीय घटनाएं, कलेष, मानसिक तनाव व बीमारियों का सामना व्यक्ति को करना पड़ता है। हर विचार, व्यवहार तथा घटना का रिएक्शन होता है, सकारात्मक का सकारात्मक व नकारात्मक का नकारात्मक होता है। हमें सकारात्मक उर्जा को संचित करना है तथा नकारात्मक व्यवहार, विचार को योग व ध्यान से मन से निकालना है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की संभागीय केन्द्र प्रभारी बी.के. कमल ने सभी का आभार जताते हुए संभागीय केन्द्र में राजयोग का ध्यान करने का आग्रह किया। डॉ.आर.के. काजला, श्रीमती रामेश्वरीय भगवानाराम डूडी सहित अनेक लोगों ने तीन दिवसीय सत्र सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाला तथा मन को शांत करने वाला, आत्म-परमात्मा का चिंतन करने वाला तथा स्वयं को खुश रखने तथा दूसरों को खुशी देने वाला बताया। उपस्थित लोगों ने मोमबती जलाकर तथा अपने भाव लिखकर अपना ’ जन्मोत्सव गीतों के साथ, केक खाकर मनाया। ’’ओ पालन हारे, निर्गुण और न्यारे, तेरे बिन कौन नहीं’’ गीत के साथ सभी सभी लोगों ने शारीरिक,मानसिक व आर्थिक और पारिवारिक, सामाजिक चिंताओं व उलझनों को परमात्मा से दूर करने की विनती की तथा सबके मंगलमय जीवन की कामना की।

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Prakash Samsukha

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