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श्रीमद् भागवत तो दिव्य कल्पतरु है यह अर्थ, धर्म, काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करती हैं – आचार्य बिक्रम जी
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बीकानेर – जस्सूसर गेट बाहर दुर्गा माता मंदिर के मोहता गार्डन में चल रही
श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन भक्ति ,संगीत, भावुकता भरा रहा ।कथा वाचक बिक्रम जी आचार्य कथा बताते हुए बोले कि  
राजा परीक्षित के कारण हि भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य मिला हैं।

समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और नहीं बदले जा सकते हैं। कथा वाचक बिक्रम जी आचार्य वृंदावन वालो ने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है।
इसके साथ साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुन्ती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। क्यों कि दुख में ही तो गोविंद का दर्शन होता है। साथ साथ परीक्षित को श्राप कैसे लगा तथा भगवान श्री शुकदेव उन्हे मुक्ति प्रदान करने के लिये कैसे प्रगट हुये इत्यादि कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। साथ ही श्रीमद् भागवत तो दिव्य कल्पतरु है यह अर्थ, धर्म, काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नही साक्षात श्रीकृष्ण स्वरुपहै। इसके एक एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाये हुये है।

उन्होंने कहा कि कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मो से बढ़कर है। कथा सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा के मध्य में भजन सुनकर भक्त आत्मसात हो गये।

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Gordhan Soni

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