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तेरापंथ मेरा पथ  कार्यशाला  का आयोजन , आत्मा द्वारा किया गया धर्म ही मोक्ष प्राप्ति का साधन ।
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नोखा ।
आचार्य भिक्षु ने सत्य मार्ग के लिए क्रांति की घोर कष्टों  को सहन किया।   लौकिक धर्म और लोकोत्तर धर्म की व्याख्या सरल ढंग से बतलाई । दान, पुण्य, परोपकार,  करुणा , दया किस प्रकार कैसे की जाए , प्रत्येक सांसारिक  कार्य में धर्म ही हो यह गलत है । कार्य पाप के करते हो पुण्य बताते हो,  थोड़ा पाप अधिक पुण्य यह मिश्र धर्म आत्म कल्याण नहीं कहा जा सकता । धर्म तो धर्म ही रहेगा
सम्यक्त्व का श्रावक में होना आवश्यक बताया । बिना सम्यक्त्व ,  सकारात्मकता के मोक्ष प्राप्त नहीं होगा । अनेक दृष्टांतों के माध्यम से सरल ढंग से वरिष्ठ श्रावक श्री डालिम चंद जी नौलखा ने विस्तार से उपस्थित श्रावक श्राविकाओं  को बताया । तेरापंथ महिला मंडल द्वारा “स्वामी पथ दिखाओजी”  गीतिका  का संगान मंगलाचरण से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
शासन गौरव साध्वी राजीमतीजी ने कहा आचार्य भिक्षु लब्धि प्रतिष्ठित,  अतीन्द्रिय चेतना के,  सत्य के उपासक थे।  उन्होंने भाव दीक्षा ग्रहण की । उन्होंने कहा  है प्रभो ! यह तेरापंथ अर्थात  हे भगवान यह तो आपका पथ है मैं तो पथिक हूं।  ढाई सौ वर्ष पूर्व का तेरापंथ आज मेरा पंथ बनता जा रहा है । आचार्य भिक्षु ने आचार और विचार  की क्रांति की । वह कठोर साधक थे । विरोधों को सहा, शमशान में रहे , अंधेरी ओरी में रहे फिर भी साधुत्व के प्रति सजग रहे । भिक्षु ना होते तो हम भटक जाते । गौरव है कि इस शासन में हम साधना कर रहे हैं । सिद्धांत के पक्के थे नई लकीरें खींची ।नोखा कार्यशाला में वरिष्ठ श्रावक डालिम चन्द जी  का आना सोने  में सुहागा बताया । साध्वी श्री कुसुम प्रभाजी , साध्वी पुलकित यशा जी,  साध्वी श्री प्रभात प्रभा जी, साध्वी मनोज्ञ प्रभा जी  ने भी आचार्य भिक्षु के साधना संयम और मर्यादा अनुशासन के बारे में कथानक के माध्यम से विस्तार से बताया । सभा अध्यक्ष शुभकरण चौरडिया,  महिला मंडल अध्यक्ष प्रीति मरोठी , तेयुप अध्यक्ष निर्मल चोपड़ा ने उपासक प्रशिक्षक श्री डालिम चन्द जी नौलखा का स्वागत व अभिनंदन किया ।
इंदरचंद बैद ‘कवि’  ने बताया कि तेरापंथ मेरा पथ कार्यशाला दो चरणों में 6 घंटे व्यवस्थित चली। जोरावरपुरा, पांचू व आसपास के श्रावक श्राविका भी पहुंचकर उत्साह से भाग लिया ।  250 श्रावक श्राविका उपस्थित रहे।  भोजन अवकाश के बाद पुनः  प्रश्नोत्तरी ,जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम भी रोचक एवं प्रेरणास्पद रहा।
विशेष करके “शासन गौरव” साध्वी राजीमतीजी 93 वर्ष की उम्र में भी सान्निध्य प्रदान किया प्रवचन पाथेय प्रदान किया। कुशल संचालन उपासक अनुराग बैद ने किया ।
सभा मंत्री मनोज घीया,  युवक परिषद ,किशोर मंडल , कन्या मंडल सभी व्यवस्था में लग रहे ।इस कार्यशाला से आध्यात्मिक धर्म का मर्म समझने को मिला , प्रशिक्षण सकारात्मक रहा ।आभार ज्ञापन श्री सुशील भूरा ने किया।
मीडिया प्रभारी
इन्द्र चंद बैद ‘कवि’  नोखा

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Gordhan Soni

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