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इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में एआई सुरक्षा पर राष्ट्रीय बूटकैंप का आगाज
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संभागीय आयुक्त ने साइबर रक्षा की उभरती चुनौतियों पर जताया सरोकार

इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में सोमवार को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती ‘एआई सुरक्षा’ पर केंद्रित छह दिवसीय राष्ट्रीय बूटकैंप का भव्य शुभारंभ हुआ। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के ISEA-III प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘सिक्योरिंग एआई सिस्टम्स: मैलवेयर डिटेक्शन एंड एडवर्सरियल डिफेंस अप्रोचेस’ रखा गया है।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बीकानेर संभागीय आयुक्त श्री विश्राम मीणा ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत कीl

अपने संबोधन में श्री विश्राम मीणा ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में साइबर सुरक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में हमलावरों की तकनीकें पल-पल बदल रही हैं, ऐसे में हमारी रक्षा प्रणालियों का उनसे दो कदम आगे रहना अनिवार्य है। उन्होंने एआई के दौर में बढ़ते खतरों के प्रति सचेत करते हुए मजबूत साइबर डिफेंस तंत्र विकसित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि और बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलसचिव श्रीमती रचना भाटिया ने तकनीकी शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए कहा कि एआई के भविष्यगामी विस्तार और उससे जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए ‘ग्रास रूट’ इंजीनियरिंग कौशल को निखारना समय की मांग है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

समारोह के दौरान बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी श्री हनुमान प्रसाद, यूसीईटी बीकानेर के प्राचार्य डॉ. परबन्त सिंह और इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर के कुलसचिव डॉ. अमित सोनी भी मंचासीन रहे। डॉ. अमित सोनी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि एआई सुरक्षा केवल एक तकनीकी जरूरत नहीं बल्कि भविष्य में रोजगार के बदलते स्वरूप का एक बड़ा आधार है। प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक डॉ. राज कुमार चौधरी ने विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि MeitY के इस महत्वाकांक्षी ISEA-III प्रोजेक्ट में देश के 50 शीर्ष संस्थान जिनमें प्रमुख आईआईटी, एनआईटी, नायलेट केंद्र और 10 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं, 10 अलग-अलग क्लस्टरों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बूटकैंप में हाइब्रिड मोड के माध्यम से देश भर से 200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

सह-मुख्य अन्वेषक डॉ. अजय चौधरी ने कार्यक्रम की तकनीकी विशिष्टताओं की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी छह दिनों तक चलने वाले इस शिविर में देश-विदेश के विख्यात विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेंगे। इसमें आईआईटी बॉम्बे के प्रो. वीरेंद्र सिंह, एमनआईटी जयपुर के डॉ. इमैनुएल पीली, कनाडाई साइबर सुरक्षा संस्थान के डॉ. विकास चौहान, आईआईटी जम्मू के डॉ. यमुना प्रसाद, डॉ. सत्यदेव अहलावत व डॉ. गौरव वार्ष्णेय और डीटीयू नई दिल्ली के डॉ. अंशुल अरोड़ा जैसे दिग्गज विशेषज्ञ व्याख्यान और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेंगे।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. गरिमा प्रजापत ने किया। बूटकैंप के संयोजक डॉ. राज कुमार चौधरी, डॉ. अजय चौधरी और डॉ. राहुल राज चौधरी  हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान महाविद्यालय के अनेक विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह बूटकैंप 28 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसमें एआई प्रणालियों को सुरक्षित बनाने की आधुनिक विधियों और मैलवेयर डिटेक्शन की बारीकियों पर गहन चर्चा की जाएगी।

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Gordhan Soni

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