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विधानसभा में अंशुमान सिंह भाटी ने कहा बीकानेर शहर की परिधि में आने वाली गौचर भूमियों को हिन्दूस्तान के सबसे बड़े गौ-अभ्यारण्य के रुप में विकसित किया जाए
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कोलायत मुख्यालय पर नगरपालिका के गठन की मांग

देशनोक नगरपालिका अध्यक्ष के खिलाफ 2021 में अपने व रिश्तेदारों के नाम जारी गलत पट्टों को निरस्त करने व भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से जांच की मांग

बीकानेर 25 फरवरी । कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने विधानसभा में नगरीय विकास, आवासन और स्वायत्त शासन विभाग की मांगों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि कोलायत मुख्यालय पर नगरपालिका घोषित करने व बीकानेर शहर की परिधि में स्थित शरह नथानियान, सुजानदेसर, भीनासर व उदयरामसर सहित अन्य गौचर भूमियों को हिन्दूस्तान के सबसे बड़े गौ-अभ्यारण्य के रूप में विकसित करने की मांग की। वहीं देशनोक नगरपालिका में वर्ष 2021 में तत्कालीन अध्यक्ष ने पद का दुरूपयोग करते हुए जारी पट्टों को निरस्त करते हुए दोषियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से कार्यवाही करने की मांग की ।

विधायक भाटी ने कहा दिनांक 8.12.2010 को राजस्व विभाग जारी अधिसूचना में निकाय क्षेत्र में स्थित समस्त राजकीय भूमियों को नगरीय विकास, आवासन अथवा स्वायत्त शासन विभाग द्वारा भू राजस्व लगान की चालीस गुना राशि जमा कराने के उपरांत उस भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित निकाय के नाम दर्ज करने का प्रावधान किया गया था। उसके बाद 17.12.2019 को राजस्व विभाग द्वारा जारी परिपत्र में यह भी निर्देश किया गया कि जो राजकीय भूमियां हैं, जिन्हें पूर्व में या फिर भविष्य में संबंधित निकाय के नाम दर्ज कर दिया गया है या कर दिया जाना है, उन राजकीय भूमियों की तुरंत प्रभाव से किस्म परिवर्तन कर गैर मुमकिन आबादी दर्ज की जावे। जिसके बाद डीएलबी ने 23.09.2021 के आदेश में जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिनियम की धारा 54 व जोधपुर अजमेर विकास प्राधिकरण की अधिनियम की धारा 48 की तर्ज पर संपूर्ण राजस्थान में नगरपालिका अधिनियम 2009 में संशोधन कर धारा 48-ए व नगर सुधार अधिनियम धारा 48 जोड़ी गई। इससे नगरीय निकाय क्षेत्रों में आने वाली समस्त राजकीय भूमियां, जिनमें गोचर चारागाह भी शामिल है, ऐसी तमाम राजकीय भूमियों को संबंधित निकाय के डिस्पोजल पर रख दिया और उनमें उनके सारे पावर निहित बेकार कर दिये। भाटी ने कहा कि जिसके बाद निकाय क्षेत्रों में गोचर भूमियों को खुर्द बुर्द करने के लिए डीएलबी ने 17.4.2025 को आदेश पारित किया और 01.09.2025 को एक स्पष्टीकरण आदेश भी जारी किया गया, जिसमें निकाय क्षेत्रों में स्थित गोचर भूमियों का अस्तित्व खतरे में आ चुका है। सबसे चिंताजनक विषय यह है कि 17.12.2019 के राजस्व विभाग के आदेश, को भाटी ने कोट करते हुआ कहा कि राजकीय भूमियां, जिनमें चारागाह भी शामिल है, निकाय के नाम दर्ज होने के बाद नगरीय भूमि शहरी भूमि (अर्बन लैंड) हो जाती है और जिनकी क्षतिपूर्ति देना भी अपेक्षित नहीं है। जिससे राजस्थान के अंदर जितने भी निकाय क्षेत्र हैं, उनके दस, बीस, चालीस किलोमीटर परिधि क्षेत्र के अंदर, उनके पेरीफेरी एरिया के अंदर लाखों बीघा गोचर भूमि है। वह लाखों बीघा गोचर भूमि सभी निकायों के नाम दर्ज होगी और जो उसकी जमीन की किस्म है, गैर मुमकिन गोचर उसे परिवर्तित करके गैर मुमकिन आबादी कर दी जाएगी। इससे राजस्थान की लाखों जो गोवंश है, जिसको हम हमारी मां कहते हैं, उसके अस्तित्व पर खतरा आएगा तो निश्चित तौर पर हमें इस पर भी खासतौर पर ध्यान देना चाहिए। भाटी ने सदन में गुलाब कोठारी बनाम सरकार का एक उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि 1947 में जितनी भी गोचर राजस्थान के अंदर थी उस गोचर के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं करी जावे।

भाटी ने कहा कि इसके बावजूद भी जितने भी आदेश समय समय पर आए, यह सब उसके विपरीत है। स्वामी रामसुखदास जी महाराज हमेशा यह बात कहा करते थे कि जो भारतीय संस्कृति को अगर बचाना है तो गीता, गाय और गांव का संरक्षण हमें करना पड़ेगा। परंतु जब यह गोचर ही नहीं बचेगी तो हमारी गाय कैसे बचेगी ? और जब हमारी गाय नहीं बचेगी तो हमारी भारतीय संस्कृति कैसे बचेगी ? भाटी ने कहा कि गोचर गायों के लिए है, गायों के विचरण के लिए उनके लिए ही जमीन बचनी चाहिए। हमारे साधु संतों के प्रवचन में हमेशा ये बात करते हैं कि गोचर पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति वो व्यक्तिचंडाल व राक्षस के समान होता है और वहीं हमारा एक डिपार्टमेंट यह बात कहता है कि आपकी सारी जमीन, गोचर की जमीनों को हम भूखंड काटेगें । हमारे साधु संत, हमारा सनातन धर्म सही है या फिर यह विभाग ? भाटी ने आदेशों में संशोधन कर सुधार करके इस गोचर को बचाने की मांग की ।

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भाटी ने कहा कि गैर मुमकिन गोचर हो, चाहे गैर मुमकिन ओरण हो, उसके हम कोई भी धनी नहीं है। यह जितनी भी गैर मुमकिन गोचर है, चाहे ओरण है, यह सभी हमारे पुरखे शीश कटा के बचाई और कई की जगह तो जितने भी हमारे बड़े बड़े भामाशाह दानदाता हैं, उन्होंने खुद की निजी आय से यह सारी गोचर जमीनें छुड़वाई। जिन जमीनों के हम मालिक नहीं हैं, एकमात्र कस्टोडियन है। भाटी ने कहा कि हम सब गाय माता के नाम पर वोट लाते हैं और पक्ष विपक्ष की इस दलगत राजनीति को तोड़ते हुए हमें इस पर निश्चित तौर पर, जिस पर कई सालों से कोई निर्णय नहीं लिया गया, इस पर निर्णय लेना चाहिए और हमारे जितने भी ये ऑर्डर निकले हुए हैं, नगरीय निकाय क्षेत्र में गोचर को खत्म करने के लिए उसको तुरंत प्रभाव से हटाना चाहिए।

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