



गौ सेवा का जुनून आरोही क्रम से हृदयस्थ बसे यही भाग्यशाली की पहचान
है जिस घर में गौ माता,.. वही पर भगवान है
गौ संरक्षण ही धर्म धन एवं संस्कृति संरक्षण करने जैसा है
वो कहते खुद को गहरे से गहराई न पी समुद्र की
राष्ट्रीय कवि चौपाल की 565 वीं कड़ी गाय माता सृष्टि हित का नाता विषय को समर्पित रही आज के कार्यक्रम अध्यक्षता में गौ सेवाधारी गिरधारी लाल सुथार मुख्य अतिथि में सिंह स्थल संत दौलतराम जी, महेंद्र जोशी, भंवर लाल लिम्बा, सरदार अली परिहार एवं पम्मी कोचर आचार्य आदि मंच सुशोभित हुए, कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि रे जीव तू गौ सेवा कर, स्वयं को भूल कर जीते जी अमर हो जाता। वेद पुराण शास्त्र यही समझाएं समझ गाय माता सृष्टि हित नाता।।
कार्यक्रम अध्यक्ष गिरधारी लाल सुथार ने बताया.. गाय की जीते जी ही नहीं मृत्यूपरांत भी बड़ी महत्ता है गौ सेवा का जुनून आरोही क्रम से हृदयस्थ बसे यही भाग्यशाली की पहचान है भवर लाल लिम्बा: नमन है उस धरती को जहां गौ माता का मान है, है जिस घर में गौ माता वही पर भगवान है,.. सिंह स्थल खेडा़पा रामधाम के संत दौलतराम जी अपने प्रवचन में बताया कि गौ संरक्षण ही धर्म धन एवं संस्कृति संरक्षण करने जैसा है,.. महेंद्र जोशी गाय पशु नहीं जीवन का सार है गौ विज्ञान को समझें वही पंडित वही धनवान है, पम्मी कोचर आचार्य : जीते जी गुमनामियों के अंधेरों में खो गए हैं,मरने के बाद कौन दफन होगा,.. सरदार अली परिहार : पहली मां जन्मदात्री मां दूसरी जीवन संरक्षिणी गाय माता कुरान में है कि सपने में भी गाय की असुरक्षा इस्लाम धर्म ने नहीं स्वीकार किया है
*इसी बीच राष्ट्रीय कवि चौपाल में श्री गिरधारी सुथार, महेंद्र जोशी, भंवर लाल लिम्बा आदि तीन गौ सेवा धारियों का शाॅल, श्री फल, माल्यार्पण, एवं आत्मीयता सम्मान किया, जिन्होंने स्वयं को भूल, भर हृदय गौ सेवा जुनून, जंगल जंगल घूम गौ सेवा की संरक्षण किया*
विशाल भारद्वाज : गौ माता सृष्टि की पालक, क्यों तुमको जग भूला है… सबसे करुणामई तुम माता, फिर कैसी यह लीला है? रामेश्वर साधक : गौ सेवा का जुनून जिस हृदय समाए, न भाए संसारी सुख नश्वर से एक जन्म में जन्मांतर सुख कमाएं, हनुमंत गौड़ : वो कहते खुद को गहरे से गहराई न पी समुद्र की. उथले उथले हैं इंसान सभी,तो.. राजकुमार ग्रोवर : वक्त सदा बदलता रहता है, वक्तानुसार जो ना बदले वो ज़िंदा नहीं रहता है,… के के व्यास : मैं हिंदुस्तान हूं मेरा परिचय है सड़ांध मारती सड़कें खड्डे.. सगीर भाटी : सर बुलंदी का का वजीफा है जो गुजरंगो से मैंने सिखा है,… इकरामुद्दीन कोहरी : मुहब्बत पे रिवाजों का पहरा है, न जाने कौन-सी उम्मीद पर दिल ठहरा है, कृष्णा वर्मा : देख तेरे गायों की हालत क्या हो गई भगवान इंसान बन गया हेवान,.. बी एल नवीन : लाई हयात आये कजा ले चले, अपनी खुशी आये ना अपनी खुशी,.. पवन चड्ढ़ा : ओ दुनिया के रखवाले सुन दर्द भरे मेरे नाले,.. राधा किशन सोनी : राधिके तुने बांसुरी चुराई बांसुरी चुराई क्या तेरे मन भाई
शिव प्रकाश शर्मा ने जीवन के प्रति सुझाव गीत के माध्यम से दिये
आज के कार्यक्रम में 20 प्रस्तुतियां रही और मंचासीन अतिथियों के शानदार बौद्धिक, रचनाएं रही, आज के कार्यक्रम में सिराजुद्दीन भुट्टा, छोटू खां, जरीफ, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले व शायराने अंदाज में इं हनुमंत गौड़ ने किया साथ ही साथ साहित्य लेखन के प्रति संदेश भी दिये जबकि आभार रामेश्वर साधक ने व्यक्त किया
















