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_किसान नेता और जननायक गौकुल प्रसाद पुरोहित की पुण्यतिथि कल 6 जून को किया जाएगा नमन_

_किसान नेता और जननायक गौकुल प्रसाद पुरोहित की पुण्यतिथि कल 6 जून को किया जाएगा नमन_*बीकानेर।* निर्भीक किसान नेता, जुझारू जनप्रतिनिधि और पुष्करणा समाज के पुरोधा स्व. श्री गौकुल प्रसाद जी पुरोहित की पुण्यतिथि 6 जून को श्रद्धांजलि स्वरूप मनाई जाएगी। 2 सितंबर 1915 को कलकत्ता में पं. शिवराम जी पुरोहित के घर जन्मे गौकुल प्रसाद जी ने बाल्यकाल से ही स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। स्वामी सहजानंद सरस्वती और क्रांतिवीर योगेश शुक्ल से प्रेरणा लेकर उन्होंने बिहार में किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। राजस्थान लौटने पर माणिक्य लाल वर्मा, मोहन लाल सुखाड़िया और रमेश चंद्र व्यास जैसे नेताओं के साथ स्वतंत्रता संग्राम में कंधे से कंधा मिलाया।मेवाड़ के सामंतों के अत्याचार के खिलाफ किसानों को संगठित कर आरजिया, मांडल, मेजा जैसे गांवों में तालाब, चरागाह की जमीन किसानों को दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। 1959 में सहाड़ा पंचायत समिति के प्रधान चुने जाने के बाद उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई के लिए पथरली जमीन पर कुंओं का जलस्तर बढ़ाकर नई चेतना जगाई।1962 से 1972 तक विधायक रहे गौकुल प्रसाद जी पहले मांडल [भीलवाड़ा] और फिर बीकानेर से विधायक बने। उनके प्रयासों से ही राजस्थान नहर परियोजना का कार्यालय बीकानेर आया और क्षेत्र के लोगों को नहरी क्षेत्र में भूमि आवंटन मिला। बीकानेर में पुष्करणा स्टेडियम का निर्माण भी उनकी देन है। मेवाड़ की अभ्रक खानों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी और कार्य समय का कानून लागू करवाने में भी उनका योगदान रहा। 1973 में राज्य कर्मचारी हड़ताल के दौरान उन्होंने कर्मचारियों का साथ देते हुए धारा 144 तोड़कर गिरफ्तारी दी। वे इंटक की राजस्थान शाखा के प्रथम उपाध्यक्ष भी रहे। माणिक्य लाल वर्मा और मोहन लाल सुखाड़िया जैसे नेता कठिन समय में उनसे सलाह लेते थे और उन्हें आदर से ‘गुरुजी’ कहते थे। 6 जून 1986 को उनका निधन हुआ। बीकानेर के नथुसर गेट और भीलवाड़ा के गंगापुर चौराहे पर उनकी प्रतिमा स्थापित है। आज की पीढ़ी उन्हें किसान, मजदूर और आमजन की आवाज उठाने वाले निडर जननेता के रूप में याद करती है।

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