Bikaner Live

गुरु-शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की आत्मा : स्वामी विमर्शानन्द

बीकानेर, 03 अगस्त। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा), राजस्थान  की डूंगर महाविद्यालय की स्थानीय इकाई द्वारा गुरु वंदन कार्यक्रम के अंतर्गत गुरु पूर्णिमा महोत्सव का गरिमामय आयोजन किया गया। । कार्यक्रम में शिक्षकों, छात्राओं एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान एवं गुरु-शिष्य परम्परा के महत्व को रेखांकित करते हुए आयोजित इस समारोह में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। डूंगर महाविद्यालय में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वामी श्री विमर्शानंद जी महाराज, अधिष्ठाता शिवबाड़ी मठ तथा मुख्यातिथि प्रोफेसर दिग्विजय सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं संगठन के पश्चिम क्षेत्र प्रमुख रहे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। इसके उपरांत प्रोफेसर दिग्विजय सिंह ने विषय का प्रवर्तन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु की महिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गुरु के कारण ही व्यक्ति उल्लास में जीवन जी सकता है। गुरु की महिमा ही है की सांसारिकता से परे वह समस्त प्रकार का आनंद प्राप्त कर सकता है। मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी श्री विमर्शानंद जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि गुरु समाज में संस्कार, ज्ञान और चरित्र निर्माण का आधार होते हैं तथा विद्यार्थियों को जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर राजेन्द्र पुरोहित ने की।कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर सुमन त्रिपाठी त्रिपाठी ने किया

Picture of Gordhan Soni

Gordhan Soni

खबर

http://

Related Post

बीकानेर मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल ने सुप्रसिद्ध गोगामेडी मेले में व्यवस्थाओं को लेकर रेल अधिकारियों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक, श्रद्धालुओं की सुविधा को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

Read More »
error: Content is protected !!