बीकानेर, 3 अगस्त। बच्चों को कुपोषण से मुक्त कर शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बीकानेर पीडियाट्रिक सोसाइटी द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय पोषण महाकुंभ” बीकानेर में भव्य रूप से संपन्न हुआ। देशभर के प्रतिष्ठित बाल रोग एवं पोषण विशेषज्ञों ने कार्यशाला में भाग लेकर बाल स्वास्थ्य और संतुलित आहार पर विस्तृत मंथन किया।

पैकेज्ड फूड का लेबल जरूर पढ़ें: डॉ. जी.एस. तंवर
आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. जी.एस. तंवर ने कहा कि कुपोषण केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि सही पोषण की जानकारी के अभाव का परिणाम है। उन्होंने अभिभावकों से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में छिपी ‘हिडन शुगर’ से सावधान रहने की अपील की।
उन्होंने कहा “सही समय पर, सही मात्रा में, सही प्रसंस्करण के साथ सही भोजन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।” साथ ही प्रत्येक अभिभावक से खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल पर शर्करा, प्रोटीन, वसा, रेशा और सोडियम की जानकारी अवश्य पढ़ने का आग्रह किया।
बच्चों का पोषण ही कल के भारत की जरूरत: डॉ. नीलम मोहन
आईएपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने कहा कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बच्चों के शारीरिक विकास के साथ मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा “आज के बच्चे की पोषण आवश्यकता ही कल के भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” यदि देश को स्वस्थ युवा पीढ़ी देनी है तो बचपन में संतुलित पोषण सुनिश्चित करना सबसे बड़ा निवेश होगा।
विशेषज्ञों ने दिए वैज्ञानिक सुझाव
कार्यशाला में डॉ. गौरव गोम्बर ने किशोरावस्था में पोषण, डॉ. मोहित वोरा ने गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों के पोषण प्रबंधन, डॉ. गौरव यादव ने संतुलित आहार के सिद्धांत और डॉ. श्याम अग्रवाल ने स्तनपान के महत्व पर व्याख्यान दिए।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
कार्यक्रम में बीकानेर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.सी. खत्री और डॉ. सी.के. चहार को उनके दीर्घकालीन चिकित्सा योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि सही पोषण ही कुपोषण मुक्त भारत का समाधान है। बीपीएस अध्यक्ष डॉ. रेनू अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।












