बीकानेर, 3 अगस्त। राज्य सरकार द्वारा संचालित गर्भवती महिलाओं के विशेष सघन स्क्रीनिंग अभियान का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। अभियान के दौरान उच्च जोखिम गर्भवती (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) के रूप में चिन्हित एनीमिया से पीड़ित महिलाओं का समय पर उपचार कर उनका हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार गंभीर एनीमिया की स्थिति में ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा अन्य पात्र गर्भवतियों को फेरिक कार्बॉक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, जिससे वे सुरक्षित एवं सामान्य प्रसव की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भवानी शंकर गहलोत ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मातृ एवं शिशु दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसे देखते हुए जिले में प्रत्येक गर्भवती की गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच कर हाई रिस्क गर्भवतियों का समय पर चयन किया जा रहा है। चयनित महिलाओं का नियमित फॉलोअप करते हुए आवश्यकता अनुसार एफसीएम इंजेक्शन अथवा ब्लड ट्रांसफ्यूजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
*केस-1*
*2.8 हीमोग्लोबिन से 10.8 तक पहुंची भारती*
पांचू क्षेत्र की गर्भवती भारती जब जून माह में पहली बार जांच के लिए पहुंची तो उसका हीमोग्लोबिन मात्र 2.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया। उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एएनएम संतोष ने समय पर उसे उच्च जोखिम गर्भवती के रूप में चिन्हित किया। इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पांचू के अस्पताल प्रभारी डॉ. नंदकिशोर सुथार ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल पीबीएम अस्पताल, बीकानेर रेफर किया, जहां उसे तीन यूनिट ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया। उपचार के बाद अब भारती का हीमोग्लोबिन बढ़कर 10.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया है। भारती बताती हैं कि पहले उन्हें सांस लेने में तकलीफ और अत्यधिक कमजोरी रहती थी, जबकि अब वे स्वयं को स्वस्थ एवं ऊर्जावान महसूस कर रही हैं।
*केस-2*
*एएनएम की सतर्कता से पूजा का हीमोग्लोबिन 6.5 से बढ़कर 11 ग्राम*
रणजीतपुरा निवासी पूजा जब चार माह की गर्भवती थीं, तब उनका हीमोग्लोबिन 6.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया। उप स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम मधु श्रीवास्तव ने समय रहते एनीमिया की पहचान कर उन्हें फेरिक कार्बॉक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी। चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें निर्धारित अंतराल पर तीन एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए। वर्तमान में सात माह की गर्भवती पूजा का हीमोग्लोबिन बढ़कर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो चुका है और उनकी गर्भावस्था सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है।
*केस-3*
*दुर्गा लोहार का हीमोग्लोबिन 6.8 से बढ़कर 10.9 ग्राम*
बीकानेर शहर के जसोलाई तलाई क्षेत्र निवासी दुर्गा लोहार जब पहली बार जांच के लिए पहुंचीं तो उनका हीमोग्लोबिन स्तर 6.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर था। यूपीएचसी नंबर-3 के प्रभारी डॉ. गौरव शर्मा के निर्देशन में उन्हें दो फेरिक कार्बॉक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाए गए। वर्तमान में वे आठ माह से अधिक की गर्भवती हैं तथा उनका हीमोग्लोबिन स्तर बढ़कर 10.9 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो चुका है। संस्थान द्वारा उनकी सुरक्षित संस्थागत डिलीवरी की पूर्व योजना भी तैयार की जा रही है।
डॉ. भवानी शंकर गहलोत ने बताया कि एनीमिया के उपचार का निर्णय केवल हीमोग्लोबिन स्तर से ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था की अवधि एवं संभावित प्रसव तिथि को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसी आधार पर प्रत्येक गर्भवती के लिए अलग-अलग उपचार योजना बनाई जाती है।
*कब लगाया जाता है एफसीएम और कब किया जाता है ब्लड ट्रांसफ्यूजन?*
डॉ. भवानी शंकर गहलोत ने बताया कि यदि गर्भवती का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम हो तो उसे गंभीर एनीमिया मानते हुए ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जाता है। जिन गर्भवतियों का हीमोग्लोबिन 6 से 9 ग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच होता है, उन्हें सामान्यतः 500 मिलीग्राम फेरिक कार्बॉक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार लगाए जाते हैं। हालांकि यदि गर्भवती की संभावित डिलीवरी अगले एक से डेढ़ माह में होने वाली हो तो ऐसे मामलों में, आवश्यकता अनुसार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि एफसीएम इंजेक्शन का पूर्ण प्रभाव आने में कुछ समय लगता है।












