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शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ की वार्षिक ध्वजा उत्सव
में भक्ति संगीत के साथ पूजा  व सवारी और मेला 22 को



बीकानेर, 20 अगस्त। शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय में श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के तत्वावधान में सकलश्री संघ के सहयोग से गुरुवार को वार्षिक ,ध्वजा उत्सव   के दौरान मंत्रों व भक्ति गीतों के साथ पूजा की गई। मंदिर की ध्वजाओं को बदला गया।
साध्वी श्री मुक्तांजनाश्रीजी आदिठाणा पांच के सान्निध्य में, मनोज भाई हरण के नेतृत्व में  गुरुवार को गंगेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में 18 अभिषेक, 17 भेदी पूजा व  वार्षिक ध्वजा तथा उसके बाद स्वधर्मी भक्ति का आयोजन हुआ। वार्षिक ध्वजा व पूजा व स्वधर्मी भक्ति का लाभ श्रीमती विजय देवी, शेखर चंद व किशन दुगड़ परिवार एवं हरजीत सिंह, रश्मि जैन परिवार दिल्ली ने लिया है। साध्वीवृंद सुगनजी महाराज के उपासरे से शिवबाड़ी मार्ग पर में श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष हरीश नाहटा के निवास पर आयोजित भक्तामर व दादा गुरु इकतीसा के सामूहिक पाठ में सान्निध्य प्रदान किया।  नाहटा परिवार की ओर से गंवली सजाकर साध्वीवृंद की वंदन पूजन किया गया।
बीकानेर में पहलीबार चातुर्मास कर रही साध्वीश्री सुरंजनाश्रीजी म.सा. की शिष्या साध्वी  मुक्तांजनाश्रीजी, सुरक्षाजनाश्री, सौम्यजनांश्री, चिलेहांजनाश्री व चितक्खरांजनाश्री का तीन दिन शिवबाड़ी में प्रवास रहेगा। भगवान गंगेश्वर पार्श्वनाथ के मंदिर में 22 अगस्त शनिवार को सुबह दस बजे परमात्मा की पूजा, दोपहर सवा बारह बजे परमात्मा की सवारी (वरघोड़ा) व उसके बाद स्वधर्मी भक्ति का आयोजन सकल श्री संघ के तत्वावधान में होगा।
लालेश्वर महादेव मंदिर में स्वर्ण आभूषणों का श्रृंगार
शिवबाड़ी के अधिष्ठता स्वामी विमर्शानंद गिरि के सान्निध्य में 22 अगस्त को वार्षिक मेला भरेगा। स्वामीजी ने बताया कि लालेश्वर महादेव के स्वर्ण, हीरे, मोती आदि से जड़े आभूषणों से श्रृंगार किया जाएगा। मेले के दौरान पार्किग, भीड़ नियंत्रण, जूता चप्पल स्टेण्ड की व्यवस्था की गई है। मेला स्थल पर दो तीन पूर्व ही झूले, खान पान की वस्तुओं की अस्थाई दुकानें लगनी शुरू हो गई।
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साधु-साध्वियों को आहार पानी देने में सावधानी बरते-मधुर मुनि
बीकानेर, 20 अगस्त। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य प्रवर 1008 रामलालजी म.सा.,व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास (समर्पण महोत्सव-2026 ) के तहत छबीली घाटी के सेवा सदन में चल रही श्राविकाओं की विशेष कार्यशाला ’’अब नही ंतो फिर कब’’ में गुरुवार को  मधुर मुनि ने कहा कि साधु-साध्वियों को आहार पानी देने में सावधानी बरते। 
साधुमार्गी महिला मंडल अध्यक्ष ललिता बांठिया ने बताया कि मुनिश्री ने बताया कि निर्दोष आहार यानि शुद्ध और पवित्र भोजन जिसको बनाने, साधु साध्वियों को देने में किसी प्रकार का दोष, हिंसा, जीव जन्तुओं की उत्पति या जैन परम्परा के उल्लंघन से मुक्त होना चाहिए। निर्दोष आहार शब्द मुख्य रूप् से जैन धर्म और भारतीय संस्कृति में साधु संतों की आहारचर्या से जुड़ा है। जिस भोजन में 46 प्रकार के दोषों (उद्गम दोष, उत्पादक दोष और एषणा दोष आदि ) का पूरी तरह परिहार या त्याग किया गया हो, उसे निर्दोष आहार कहा जाता है। निर्दोष भोजन विशेष रूप् से जैन मुनियों द्वारा गोचरी (भिक्षा) के माध्यम से ग्रहण किया जाता है। इसमें ध्यान रखना होता है कि भोजन किसी के विशेष आग्रह या साधु के लिए नियोजित रूप् से नहीं बनाया गया है। भोजन में किसी प्रकार की अशुद्धता, जीव (कीड़े मकोड़े ) बाल या अन्न की हिंसा न हो।
मुनिश्री ने भवी व अभवी जीव के बारे में बताया कि भवी जीव भविष्य में कभी न कभी मोक्ष (मुक्ति ) प्राप्त करने की स्वाभाविक योग्यता होती है, जबकि अभवी जीव में मोक्ष प्राप्त करने की योग्यता व पात्रता नहीं होती।  उन्होंने बताया कि अभवी साधु-साध्वियों को निर्देाष आहार देकर पुण्य का संचय कर सकता है।

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Gordhan Soni

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