
नोखा। यहाँ लाहोटी चौक वीर हनुमान मंदिर के समीप अयोध्या धाम में चातुर्मास सत्संग समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से कथा व्यास परम पूज्य दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज के श्रीमुख से हो रही वाल्मीकि रामायण कथा के 43वें दिन बुधवार 9 सितम्बर को महाराजश्री ने कहा कि आप जब भी घर से बाहर निकलते हैं तो भगवान का नाम लेकर निकलें चाहे किसी भी वाहन अथवा पैदल और जब वापस घर आते हैं तो भी भगवान का नाम लेकर उनका धन्यवाद करें। उन्होंने शगुन और अपशगुन को लेकर कहा कि पुरुष का कोई भी बाँया अंग फड़कना और महिलाओं का दाहिना अंग फड़कना अपशकुन माना जाता है। यह बात श्री वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड के प्रसंगों को लेकर कही। उन्होंने कहा कि युद्ध में जाने के दौरान किसी भी प्रकार का अपशकुन होने के कारण अनिष्ट हुआ है। रावण को उसके भाई, नाना और योद्धाओं द्वारा समझाने के बावजूद वह नहीं माना और युद्ध में अपने बेटों, भाइयों सहित अनेकों योद्धाओं, राक्षसों को मरवाने के बाद रावण पक्ष में विरोधाभास होने लगा और कहते हैं कि ये सबको मरवा कर फिर मरेगा। जैसे ही रावण के सेनापति प्रहस्त ने रावण से कहा कि मैंने पहले ही आपको बहुत समझाया लेकिन आप नहीं माने। मैंने कहा कि सीता को लौटा दो लेकिन आपने कहा जान दे सकता हूँ जानकी नहीं। प्रहस्त ने कहा कि युद्ध में जाने से पहले ही अपशकुन हो रहे हैं, झंडे लड़खड़ा कर जमीन पर गिर रहे हैं। बड़ा भारी युद्ध हुआ, किस तरफ से कितने मर रहे हैं कभी वानर राक्षसों को मारते हैं तो कभी राक्षस वानरों को मार रहे हैं। नील और प्रहस्त के बीच युद्ध हुआ तो नील ने प्रहस्त को पत्थरों से मार कर खत्म कर दिया। इससे रावण चिंतित होकर अपने सेनापति के मरने के बाद कहा कि अब में युद्ध करने जाऊँगा। रावण को रथ पर आते देख कर राम ने सुग्रीव व हनुमान से पूछा कि यह कौन आ रहा है तो उन्होंने कहा यह रावण है। जब रावण ने हनुमानजी को देखा तब कहा आज मैं इसे लंका जलाने का इनाम दूंगा। हनुमान ने रावण को थप्पड़ मार कर घायल कर दिया। राम और रावण का सामना हुआ, राम ने रावण को तीर मारा फिर कहा तुझे अभी इतना जल्दी नहीं मारूँगा, रावण लज्जित होकर चला गया ओर भाई कुम्भकरण को नींद से जगाया गया । उक्त प्रेस नोट सिमिति के इंदरचंद मोदी ने जारी किया।

















