
नोखा स्थित लाहोटी चौक में चातुर्मास सत्संग समिति की ओर से 29 जुलाई से चल रही श्री वाल्मीकि रामायण कथा के 46वें दिन शनिवार को व्यास पीठ पर विराजित डंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज ने युद्धकांड की सम्पन्नता की ओर बढ़ते हुए कहा कि आज लोग कोई कार्य करते हैं तो उसका दिखावा, प्रचार-प्रसार आदि करते हुए अपनी बड़ाई, प्रशंसा अपने मुख से करते हैं अथवा दूसरों द्वारा की जाती बड़ाई सुनकर प्रसन्न होते हैं। महाराज श्री ने कहा कि अगर आप किसी साधु-संत की सेवा, गौसेवा अथवा किसी प्रकार का दान-पुण्य करने पर इसका प्रचार, दिखावा, बड़ाई आदि करने पर आप द्वारा किया गया पुण्य अक्षुण हो जाता है, इसलिए किए गए पुण्य का बखान नहीं करना चाहिए। युद्धकांड पर बोलते हुए महाराज ने कहा कि जो कार्य करते हैं उससे दूसरों का अहित नहीं होना चाहिए। दक्ष प्रजापति मेघनाथ अपनी शक्ति बढ़ाने और दूसरों का बुरा करवाने के लिए यज्ञ करवाना प्रारंभ किया तो विभीषण जी ने भगवान शंकर से कहा कि मेघनाथ यज्ञ करवा रहा है, अगर उसका यज्ञ पूर्ण हो जाएगा तो वह किसी भी प्रकार का दूसरों के अहित का कार्य करेगा। इसलिए इसका यज्ञ नष्ट करवाइए और उसको मारिए। मेघनाथ ने जब अपने चाचा एवं रावण के भाई विभीषण को राम-लक्ष्मण आदि के साथ देखकर उनको बहुत भलाबुरा कहते हुए तिरस्कार किया और शत्रु के परिवार में मिलने की बात कहने पर विभीषण जी कहते हैं कि मेरा भाई रावण दुष्कर्म, परस्त्री सीता का हरण जैसे पाप कार्य करने के कारण उसे विधर्मी भी को छोड़कर भगवान राम की शरण में आ गया। मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच तीन दिनों तक बाणों से युद्ध हुआ। अंत में लक्ष्मण ने भगवान राम का नाम लेकर मेघनाथ का सिर काट दिया। भगवान राम ने लक्ष्मण को गले लगाया, देवताओं ने दुंदुभि बजाकर पुष्प वर्षा की और प्रसन्नता जताई। समिति के इंदरचंद मोदी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि प्रहलाद मोहता, नारायण राठी, गिरधारी पारीक, पवन चांडक, दामोदर तिवाड़ी आदि व्यवस्था को सुचारू बनाने में जुटे हैं।”
















