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युग प्रवर्तक होते हैं सच्चे धर्मोपदेशक – दंडी स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती

यज्ञ करने से केशर की वर्षा होती है -डॉ सप्तर्षि मिश्र
12 सितंबर, पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज की 30 वीं पुण्यतिथि-  आराधना महोत्सव में समर्थश्री स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी धन्य हैं जो महापुरुषों की गाथा गा और सुन रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजन देव तीर्थ जैसे धर्मोपदेशक युगों को बदलने की क्षमता रखते हैं। युग प्रवर्तक कहलाए जाते हैं। अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में ऐसा योद्धा रहा जिसकी गाथा युगों युगों तक सुनाई देती रहेगी। हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप का पराक्रम आज भी इतिहास के सुनहरे पन्नों में अंकित है। धर्मयुद्ध का क्षेत्र हो या धर्मसभा का पाण्डाल हो उसका इतिहास स्वर्णिम ही होता है। अखिल भारत वर्षीय धर्म संघ के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य डॉ सप्तर्षि मिश्र ने कहा कि राजस्थान की रज चन्दन के समान है, राजस्थान की पवित्र भूमि पर सन्त महापुरुषों का अवतार हुआ है उनमें से एक सद्गुरुदेव स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज रहे। डॉ सप्तर्षि मिश्र ने बचपन का आंखों देखा संस्मरण सुनाते हुए कहा कि बात 1978 की है बीकानेर के पुष्करणा स्टेडियम में सहस्र चण्डी महायज्ञ का आयोजन किया गया, धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज, स्वामी श्री शिवानन्द सरस्वती जी महाराज उस यज्ञ के साक्षी रहे, एक दिन कुछ नास्तिक लोगों ने महाराज जी से कहा कि यहां अकाल पड़ा है लोग भूखे हैं और आप लोग अन्न और घी जला रहे हैं यह सुनकर सद्गुरुदेव मंच से वोले कि यज्ञ करने से वर्षा होती है यह श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान ने कहा है और मैं कहता हूं कि यज्ञ करने से केशर की वर्षा होती है। देवियों और सज्जनों बीकानेर में वर्षा हुई उस वर्षा में केशर वर्षी।मैंने उस महायज्ञ में आहुतियां देकर अपने को सौभाग्यशाली बनाया है। चूरू निवासी बेला दाधीच ने गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए स्वरचित कविता सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। दिल्ली से आए विद्वान आचार्य ने कहा जहां विद्वान सन्त महापुरुषों का सानिध्य प्राप्त होता है वह स्थान तीर्थ बन जाता है। ब्रह्मचारी हरिहर चैतन्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत भूमि अवतार की भूमि है,यज्ञ की भूमि है,तप की भूमि है अन्य किसी भी देश का ऐसा इतिहास नहीं है। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने हमें जो मार्ग दिखाया है हमें उसी पर चलना है।
पुष्पांजलि सभा में उपस्थित आचार्य हेमेंद्र, आचार्य उदित, आचार्य अमर, आचार्य मृदुल, आचार्य आदर्श और आचार्य पंकज ने अपने विचार व्यक्त किए। हजारों माता – बहनों एवं श्रद्धालु भक्तों ने पुष्पांजलि अर्पित कर आरती भी की।
बताते चलें कि हम श्रृद्धालु जन पूज्य सद्गुरुदेव की पावन स्मृति में  *शंकराचार्य स्मृति वन्दन सप्ताह*  राजस्थान की राजधानी जयपुर, चूरू आदि महानगरों में आयोजित कर रहे हैं। नोखा में 29 जुलाई से 2O अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहे भव्य चर्तुमास महोत्सव समिति के मीडिया  प्रभारी इन्द्र चन्द मोदी द्वारा जारी प्रेसनोट में उक्त जानकारी दी गई ।

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Gordhan Soni

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