



जस्सूसर गेट से चौखूंटी पुलिया तक जगह-जगह दिख रही बदहाली, पौधे सूखे तो लोगों ने कचरा डालना शुरू किया
बीकानेर। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से कुछ वर्ष पहले विभिन्न प्रमुख मार्गों और स्थानों पर पौधारोपण के लिए लोहे के बड़े और आकर्षक पात्र लगाए गए थे। शुरुआत में इन पात्रों में लगाए गए पौधों से शहर की सुंदरता भी बढ़ी, लेकिन समय के साथ देखरेख के अभाव में यही पात्र अब कचरा पात्र में तब्दील होते नजर आ रहे हैं।
जस्सूसर गेट के बाहर ऐसे करीब 30 बड़े पात्र लगाए गए थे। प्रत्येक पात्र को लोहे की मजबूत जाली के आकार में तैयार कर उसके अंदर मोटी प्लास्टिक की परत लगाई गई थी। इसके बाद उसमें बालू-रेत भरकर पौधे लगाए गए थे। एक पात्र में करीब 20 से 25 तक पौधे लगाए जाने की व्यवस्था थी। इस हिसाब से यहां लगाए गए पात्रों में सैकड़ों पौधे लगाए गए थे। जब इन पौधों की देखभाल हो रही थी, तब यह पूरा क्षेत्र काफी सुंदर दिखाई देता था।
देखरेख नहीं होने से सूख गए पौधे
स्थानीय दुकानदार किशोर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से इन पात्रों की नियमित देखभाल नहीं हो रही है। पानी नहीं मिलने और रखरखाव के अभाव में अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। कई जगह सूखे और कांटेदार पौधों के अवशेष ही दिखाई दे रहे हैं। पौधों के स्थान पर अब लोग इनमें कचरा डालने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था नियमित नहीं होने या कई स्थानों पर लोगों को कचरा डालने में परेशानी होने के कारण भी लोग इन खाली पड़े पात्रों का इस्तेमाल कचरा डालने के लिए कर रहे हैं। इससे जिस उद्देश्य से इन्हें लगाया गया था, उसका स्वरूप ही बदल गया है।
जस्सूसर गेट से चौखूंटी पुलिया तक बदहाल स्थिति
जस्सूसर गेट से लेकर चौखूंटी पुलिया तक कई स्थानों पर ऐसे पात्र दिखाई देते हैं, जिनमें पौधों की जगह कचरा जमा है। कुछ पात्र पूरी तरह खराब हो चुके हैं तो कुछ वहां से गायब भी हो गए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि शहर के सौंदर्यीकरण पर खर्च किए गए संसाधनों के बाद यदि इनकी नियमित देखरेख नहीं की जाए तो ऐसी योजनाओं का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले कुछ पात्र दूसरी जगह पहुंचाए गए
हाल ही में मुख्यमंत्री के बीकानेर दौरे के दौरान महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में कार्यक्रम को देखते हुए कुछ पात्रों को जस्सूसर गेट क्षेत्र से उठाकर दूसरी जगह ले जाया गया था। अब इन पात्रों की स्थिति और उनके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ पात्र महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के बाहर दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ पुगल फांटा और गौशाला के आसपास रखे गए हैं। कुछ पात्र अन्य स्थानों पर चले गए हैं, जबकि कुछ के गायब होने की भी बात सामने आ रही है।
जिम्मेदार विभाग से कार्रवाई की मांग
स्थानीय दुकानदारों और लोगों का कहना है कि यदि इन पात्रों में दोबारा पौधे लगाए जाएं, नियमित पानी और खाद की व्यवस्था की जाए तथा खराब पात्रों की मरम्मत कराई जाए तो शहर के प्रमुख मार्गों का स्वरूप फिर से बेहतर हो सकता है। साथ ही इन पात्रों में कचरा डालने की समस्या को रोकने के लिए नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी जरूरत है।
शहर को सुंदर बनाने के उद्देश्य से लगाए गए ये पात्र आज खुद बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। ऐसे में अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इनकी स्थिति का सर्वे कराकर यह तय करे कि कितने पात्र मौके पर हैं, कितने खराब हुए और कितने गायब हैं, ताकि योजना को उसके मूल उद्देश्य—शहर को स्वच्छ, हरा-भरा और सुंदर बनाने—से फिर जोड़ा जा सके।














