

मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क प्रारंभ किए जाने की मिली सैद्धांतिक स्वीकृति
बीकानेर, 08 अक्टूबर। वन्यजीव सप्ताह-2026 के समापन अवसर पर राजुवास सभागार में समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास, संभागीय मुख्य वन संरक्षक श्री सेडूराम यादव, जिला कलेक्टर श्री निशांत जैन तथा उप वन संरक्षक, टेरिटोरियल श्री वेंकटेश सहित वन विभाग के अधिकारी, वन्यजीव प्रेमी, विद्यार्थी एवं आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ।
समारोह में वन्यजीव रेस्क्यू एवं जोड़बीड-गाढ़वाला कंजर्वेशन रिजर्व पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। साथ ही वाइल्डलाइफ़ फोटोग्राफी एग्ज़ीबिशन एवं वाइल्डलाइफ़ फोटोग्राफी कॉम्पीटिशन का आयोजन किया गया, जिसमें प्राप्त प्रविष्टियों का निर्णायक मंडल द्वारा मूल्यांकन किया गया।
*वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर विकसित करना आवश्यक*
समारोह के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने थार मरुस्थल में दूर-दूर स्थित वन क्षेत्रों को आपस में जोड़कर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वन्यजीव सामान्यतः स्वयं आगे बढ़कर किसी पर हमला नहीं करते और आवश्यकता से अधिक संग्रह करने की प्रवृत्ति भी उनमें नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज समाज में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ रही है, ऐसे समय में हमें प्रकृति और वन्यजीवों से संतुलन एवं संयम की सीख लेनी चाहिए।
*मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी*
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कलेक्टर श्री निशांत जैन ने वन्यजीव सप्ताह के दौरान वन विभाग द्वारा मरुस्थलीय फ्लोरा एवं फॉना के प्रति जनजागरूकता के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के लिए मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र को समझना और उसका संरक्षण करना आवश्यक है। विद्यार्थियों एवं आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों का निरंतर आयोजन किया जाना चाहिए।
उन्होंने वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित वाद-विवाद, निबंध लेखन, क्विज, फोटोग्राफी, पोस्टर मेकिंग एवं रंगोली प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
*‘कनैक्टिंग हैबिटैट्स एंड थ्रीविंग वाइल्डलाइफ़ ’ थीम पर दिया संदेश*
संभागीय मुख्य वन संरक्षक श्री सेडूराम यादव ने थार इकोसिस्टम की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए गिद्धों को पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण ‘प्राकृतिक सफाईकर्मी’ बताया। उन्होंने वन्यजीव सप्ताह-2026 की थीम ‘Connecting Habitats and Thriving Wildlife’ की व्याख्या करते हुए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को आपस में जोड़ने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने बताया कि बीकानेर संभाग में मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क शीघ्र प्रारंभ किए जाने की दिशा में कार्य चल रहा है। इसके विकसित होने से बीकानेर को एक नए पर्यटन एवं प्रकृति-आधारित आकर्षण के रूप में पहचान मिलने की संभावना है।
*मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति*
उप वन संरक्षक, वन्यजीव श्री तरुण कुमार मेहरा ने वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार से मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क प्रारंभ किए जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। शीघ्र ही जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों द्वारा पार्क का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके पश्चात देश के विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ एनिमल एक्सचेंज प्लान के तहत वन्यजीवों को मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क में लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि बीछवाल क्षेत्र में मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क से लगी वन भूमि पर डेजर्ट बॉटनिकल गार्डन भी विकसित किया गया है। यहां थार क्षेत्र की विभिन्न पादप प्रजातियों का रोपण किया गया है, जिससे विद्यार्थियों एवं आमजन को मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधों तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी।
*वन्यजीव प्रेमियों एवं सेवानिवृत्त वनकर्मियों का सम्मान*
समारोह में वन्यजीव सप्ताह के आयोजन में सहयोग देने वाले भामाशाहों, वन्यजीव प्रेमियों, शहर के प्रमुख जीवविज्ञानियों तथा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण एवं वनस्पति सर्वेक्षण विभाग, जोधपुर के प्रतिनिधियों सहित सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। एक अनूठी परंपरा के तहत सेवानिवृत्त वनकर्मियों एवं वन अधिकारियों का भी सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सहायक वन संरक्षक श्री कमल चंद ने वन्यजीव सप्ताह के आयोजन में सहयोग करने वाले सभी प्रतिभागियों, संस्थाओं एवं उनके प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वन्यजीव सप्ताह-2026 के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं एवं आमजन को वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों, जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा संरक्षण कार्यों में जनभागीदारी को बढ़ावा देना रहा।










