बीकानेर, राजकीय महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय, बीकानेर के वनस्पति शास्त्र विभाग की स्नातकोत्तर स्तर की छात्राएँ आज प्रातः 7:00 बजे सहायक आचार्य डॉ. विनोद कुमारी एवं डॉ. सीमा व्यास के मार्गदर्शन में वानस्पतिक भ्रमण हेतु राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर परिसर पहुँचीं। इस वानस्पतिक भ्रमण के मुख्य विशेषज्ञ वनस्पति शास्त्र विभाग, राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामकरण गहलोत रहे।
प्रो. गहलोत ने छात्राओं को पादप पहचान की वैज्ञानिक विधियों से अवगत कराते हुए पादप पहचान कुंजी (Key) एवं राजस्थान के फ्लोरा (Flora of Rajasthan) की सहायता से विभिन्न पौधों की सही पहचान करना सिखाया। उन्होंने बताया कि पत्तियों, पुष्पों, फलों तथा पौधों की अन्य बाह्य आकारिक विशेषताओं के आधार पर उनकी पहचान किस प्रकार की जाती है तथा इन लक्षणों के माध्यम से संबंधित पौधों के कुल का निर्धारण कैसे किया जाता है।
भ्रमण के दौरान उन्होंने महाविद्यालय परिसर में पाए जाने वाले प्रमुख शाकीय पौधों, जैसे सोनामुखी, गोखरू, धमासा, शंखपुष्पी, अरवा एवं खींप आदि की विभिन्न जातियों की पहचान उनकी प्रमुख बाह्य आकारिक विशेषताओं के आधार पर करवाई। इसके साथ ही खेजड़ी, जाल, शीशम, आँवला एवं सहजन जैसे वृक्षों के वानस्पतिक नाम, स्थानीय नाम, कुल तथा उनके आर्थिक महत्त्व के संबंध में भी विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमारी एवं डॉ. सीमा व्यास ने छात्राओं को पौधों के नमूने एकत्रित करने, हर्बेरियम शीट तैयार करने तथा फील्ड नोटबुक में पौधों से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ एवं प्रेक्षण व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की विधि समझाई। भ्रमण के दौरान छात्राओं ने विशेष रूप से मरुद्भिद शाकीय पौधों की सूची तैयार की तथा उनके विशिष्ट लक्षणों का अवलोकन किया।
इस वानस्पतिक भ्रमण में छात्राओं ने अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता के साथ भाग लिया। उन्होंने स्वयं पादप पहचान कुंजी का उपयोग करके विभिन्न पौधों की पहचान की, उनके विशिष्ट लक्षणों को नोट किया तथा प्रो. गहलोत से अनेक जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछकर अपनी विषयगत समझ को और अधिक समृद्ध किया।
यह वानस्पतिक भ्रमण छात्राओं के लिए सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने, स्थानीय वनस्पतियों की विविधता को समझने तथा पादप पहचान एवं हर्बेरियम निर्माण जैसे वैज्ञानिक कौशल विकसित करने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रहा।












