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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष-परिस्थितियां हर समय आपके अनुकूल नहीं हो सकती बदलाव खुद को लाना है- नीरज गुप्ता

मुस्कुराकर, दर्द भूलकर
रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी
हर पग को रोशन करने वाली
वो शक्ति है एक नारी

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी माता बहनों और नव युवतियों को आज की विशेष दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

महिला दिवस की शुभकामनाएं। आज सबसे ज्यादा महिला सशक्तिकरण की बातें होंगी। लेकिन महिला सशक्तीकरण क्या है यह कोई नहीं जानता। महिला सशक्तीकरण एक विवेकपूर्ण प्रक्रिया है। हमने अति महत्वाकांक्षा को सशक्तिकरण मान लिया है।

मुझे लगता है महिला दिवस का औचित्य तब तक प्रमाणित नहीं होता जब तक कि सच्चे अर्थों में महिलाओं की दशा नहीं सुधरती। महिला नीति है लेकिन क्या उसका क्रियान्वयन गंभीरता से हो रहा है। यह देखा जाना चाहिए कि क्या उन्हें उनके अधिकार प्राप्त हो रहे हैं। वास्तविक सशक्तीकरण तो तभी होगा जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी। और उनमें कुछ करने का आत्मविश्वास जागेगा।

यह महत्वपूर्ण है कि महिला दिवस का आयोजन सिर्फ रस्म अदायगी भर नहीं रह जाए। वैसे यह शुभ संकेत है कि महिलाओं में अधिकारों के प्रति समझ विकसित हुई है। अपनी शक्ति को स्वयं समझकर, जागृति आने से ही महिला घरेलू अत्याचारों से निजात पा सकती है। कामकाजी महिलाएं अपने उत्पीड़न से छुटकारा पा सकती हैं तभी महिला दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी

नीरज गुप्ता एक कामकाजी सरकारी सेवा में सेवारत महिला होने के साथ-साथ घर परिवार और ऑफिस में संतुलन बैठा कर खुशी के साथ अपने कार्य क्षेत्र में निरंतर प्रगतिशील है अपनी ड्यूटी अपना कर्तव्य बखूबी से निभा रही है

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