
हरियाणा के करनाल जिले में रत्तक नाम का एक गांव है। करीब तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर सिख समुदाय के लोग रहते हैं। खेती से ही इन लोगों की आजीविका चलती है। लिहाजा, गांव के तमाम लोग किसान आंदोलन में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के कई दूसरे गांवों की तरह ही रत्तक गांव के लोग भी इन दिनों दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पहुंच रहे हैं। जो वहां नहीं जा सकते, वे भी अलग-अलग तरीक़ों से इस आंदोलन में मदद कर रहे हैं।
यह पूरा गांव जिस तरह से किसान आंदोलन को समर्थन दे रहा है, उसे देखकर इस सवाल का भी जवाब मिल जाता है कि सिंघु बॉर्डर पर चल रहे लंगरों में लगातार इतना राशन कहां से आ रहा है? बिसलेरी की बोतलों से भरी हुई ट्रैक्टर ट्रॉली लिए सिंघु बॉर्डर पहुंचे रत्तक गांव के शरणजीत सिंह बताते हैं, ‘इस ट्रॉली में 70 हजार रुपए का पानी है और करीब 20 हजार रुपए का दूसरा सामान। एक दूसरी ट्रॉली भी हमारे गांव से आज आई है। उसमें करीब 60-70 हजार रुपए का राशन है। ये दूसरी बार है जब हम लोग गांव से राशन लेकर आए हैं। इससे पहले 29 नवंबर को हम सामान लाए थे और यहां अलग-अलग लंगरों में बांट दिया था।’













