काश बीकानेर भी जुड़ पाता !
ये ट्रेन जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर शहरों से चलेगी। यह दिल्ली तक चलेगी। अपनी स्पीड के कारण ये पैसेंजर्स का कीमती टाइम भी बचाएगी। जयपुर से दिल्ली पहुंचने में अभी 4.50 घंटे से भी ज्यादा टाइम लगता है। इस ट्रेन से ये सफर महज 1 घंटे 45 मिनट में पूरा हो जाएगा।
जोधपुर
ट्रेन का सफर करने वालों को अब ऐसी अनाउंसमेंट सुनाई नहीं देगी।
यात्रीगण कृपया ध्यान दें…..हमें आपको हुई असुविधा के लिए खेद है।
जयपुर से कोटा वाया अजमेर जाने वाली ट्रेन 2 घंटे देरी से प्लेटफार्म नंबर 1 पर पहुंचेगी।


ऐसा इसलिए….क्योंकि जल्द ही राजस्थान के 4 बड़े शहरों से देश की पहली सेमी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन ‘वंदे भारत’ 180 की स्पीड से दौड़ेगी। इतनी स्पीड होने के बावजूद ट्रेन के अंदर भरे गिलास से पानी की एक बूंद तक नहीं छलकेगी। यानी झटके नहीं लगेंगे।
फुली एयर कंडीशनर वाली ये ट्रेन आपको फ्लाइट जैसे महंगे सफर का फील करवाएगी। यूरोपियन स्टाइल में लगी लग्जरी सीटों को पैसेंजर किसी भी दिशा में घुमा सकेंगे। अपने सफर को रोमांचक बनाने के लिए पैसेंजर विंडो के बाहर का नजारा भी आसानी से देख सकेंगे। ट्रेन टिकट पर चाय-कॉफी से लेकर नाश्ता-लंच या डिनर भी मिलेगा।
लग्जरी सुविधाओं से लैस इस ट्रेन का सफर कैसा रहने वाला है, ट्रेन की और क्या-क्या खूबियां हैं, किराया कितना रहने वाला है, ये कौन से-कौन से स्टेशन पर रुकेगी, भास्कर रिपोर्टर ने इस ट्रेन के ट्रायल से लेकर हर फेज के बारे में जाना।
आइए देखिए- इस स्वदेशी सेमी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन से कैसे बदलेंगे आपके सफर के दिन….।
500 करोड़ होंगे खर्च, सितंबर 2023 से शुरू होगा सफर
हाल ही में कुछ दिनों पहले कोटा से नागदा के बीच ट्रेन का स्पीड ट्रायल किया गया। पहले दिन 160 की स्पीड पर ट्रायल हुआ, लेकिन अगले ही दिन पहली बार इस ट्रेन को 180 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से दौड़ाया गया। यह स्पीड ट्रायल सफल भी रहा। राजस्थान के विभिन्न शहरों में ये ट्रेन चलाने के लिए 500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें 150 करोड़ का खर्च जोधपुर के ट्रेन के डिपो के लिए होगा। अन्य पांच डिपो पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए जाएंगे। उत्तर पश्चिमी रेलवे पीआरओ शशि किरण ने बताया कि सितंबर 2023 तक 6 ट्रेन (रैक) पटरी पर होंगी।
राजस्थान में बनेंगे 6 मेंटेनेंस डिपो
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन राजस्थान में पांच स्टेशन पर आएगी। वहीं जयपुर, मदार, अजमेर, उदयपुर, श्री गंगानगर व जोधपुर में मेंटेनेंस डिपो तैयार किए जाएंगे। इन डिपो के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।
जानिए- पहली हाई स्पीड ट्रेन के कैसे होंगे कोच और कितना समय बचेगा
वंदे भारत के सेकेंड फेज की शुरुआत सितंबर 2023 तक हो जाएगी। इस ट्रेन से राजस्थान के 4 शहर जुड़ेंगे। जयपुर, उदयपुर, कोटा और जोधपुर। इन शहरों तक पहुंचने में अभी जितने घंटे लग रहे हैं, वंदे भारत से वो सफर आधे से भी कम वक्त में पूरा हो जाएगा।
जयपुर से दिल्ली, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और उदयपुर का सफर कितने घंटे में पूरा हो सकेगा, इसका एक अनुमानित आंकड़ा यहां देखिए…
देश में पहली बार पानी का गिलास रखकर 180 की स्पीड से दौड़ाई ट्रेन
सेमी हाई स्पीड ट्रेन 24 अगस्त को कोटा स्टेशन पर स्पीड ट्रायल के लिए पहुंची थी। कोटा में 6 ट्रायल हुए। पहला ट्रायल कोटा और घाट का बराना, दूसरा घाट का बराना और कोटा, तीसरा कुर्लासी और रामगंज मंडी के बीच डाउन लाइन पर, चौथा और पांचवां कुर्लासी और रामगंज मंडी और छठवां रामगंज मंडी और लबान डाउन लाइन पर हुआ। ट्रायल के दौरान ट्रेन की स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा थी। पानी का भरा हुआ गिलास रखकर ये ट्रायल किए गए, लेकिन 180 की स्पीड के बावजूद पानी नहीं छलका।
सिक्योरिटी से लैस ट्रेन, नहीं लगेंगे झटके
ट्रेन का डिजाइन इस तरह से बनाया गया है कि इसमें झटके महसूस नहीं होंगे। सुपीरियर राइड क्वालिटी होने से चलती ट्रेन में पानी का गिलास तक नहीं छलकेगा।
इंजन: ट्रेन सेल्फ प्रोपेल्ड इंजन युक्त होगी, यानी इसमें अलग से इंजन नहीं होता है। आगे और पीछे, दोनों तरफ लोको पायलट केबिन बने होंगे।
जीपीएस: ट्रेन में जीपीएस सिस्टम लगा होने से इसकी लोकेशन मोबाइल पर भी चेक कर सकेंगे। मोबाइल एप पर ट्रेन का टाइम व लोकेशन शो होगी।
सीसीटीवी: सिक्योरिटी के लिहाज से सीसीटीवी भी लगे होंगे।
वैक्यूम बेस्ड बायो टायलेट: कोच के टॉयलेट वैक्यूम बेस्ड बायो टायलेट होंगे। जैसे फ्लाइट में होते हैं। इससे टॉयलेट क्लीन रहेंगे।
इमरजेंसी पुश बटन: कोच में इमरजेंसी पुश बटन होगा, इससे किसी भी तरह की इमरजेंसी होने पर दबा सकेंगे।
यूरोपियन स्टाइल चेयर : एग्जीक्यूटिव क्लास की चेयर यूरोपियन स्टाइल की आरामदेह सीट है, जो गोल्डन, वायलेट और पिंक कलर में होती है।
फ्लाइट जैसी लगेज रैक : इस ट्रेन के लगेज रैक में एलईडी डिफ्यूज लाइट्स लगी हैं, जो अक्सर विमानों में लगी होती हैं।
इस तरह से होंगे कोच
चेयर: विस्टाडोम कोच को भी इसमें शामिल किया जाएगा। चेयर रिवॉल्विंग होगी यानी जिस दिशा में ट्रेन चल रही होगी उसी दिशा में आप अपनी चेयर को घुमा सकेंगे। यह चेयर 180 डिग्री घूम सकेगी।
ऑटोमेटिक स्लाइड डोर: मेट्रो की तरह डोर ऑटोमेटिक होंगे। स्टेशन आने पर खुलेंगे और बंद हो जाएंगे। खुलने से पहले बीप बजेगी और बंद होने से पहले भी ताकि उतरने चढ़ने वाले अलर्ट हो जाए।
AC कोच: ट्रेन पूरी तरह से एयर कंडीशनर होगी। मेट्रो की तरह ट्रेन में सेंट्रल ऐसी होगा जो पूरी ट्रेन के टेंपरेचर को मेंटेन रखेगा।
टेम्परेचर कंट्रोलर: हर कोच में टेंपरेचर को कंट्रोल करने के लिए कंट्रोल बटन होगा। इसके साथ ही अपनी सीट के पास कूलिंग को कंट्रोल करने के लिए स्विच होगा।
डिस्प्ले बोर्ड: हर कोच में डिस्प्ले बोर्ड होगा। जैसे ही नेक्स्ट स्टेशन आएगा इसमें अनाउंसमेंट किया जाएगा। डिस्प्ले बोर्ड पर इमरजेंसी नंबर व जरूरी इन्फोर्मेशन भी डिस्प्ले होगी। इसके साथ अनाउंसमेंट स्पीकर भी होंगे।
मिनी पेंट्री: यात्रियों के लिए ट्रेन में नाश्ते की व्यवस्था होगी। फ्लाइट की तरह एग्जीक्यूटिव क्लास के टिकट में ही पेंट्री व फूड का रेट शामिल होगा।
16 डिब्बे, 1196 यात्री कर सकेंगे सफर
वंदे भारत में 16 पैसेंजर कार हैं, जिसमें कुल 1,196 यात्री सवार हो सकते हैं। एक पैसेंजर कार में सीटिंग अरेंजमेंट 3X2 रहेगा और 78 सीटें होंगी। ट्रेन के बीच में दो बोगी एग्जीक्यूटिव क्लास की रहेंगी, जिसमें सीटिंग अरेंजमेंट 2X2 का होगा और 52-52 यात्री सफर कर सकेंगे।
कितना होगा किराया?
जयपुर से दिल्ली, जोधपुर, कोटा और उदयपुर का किराया कितना होगा यह अभी तय नहीं है। लेकिन, इसमें दो तरह के कोच होंगे। एक एक्जीक्यूटिव श्रेणी और दूसरी चेयर कार। अभी दिल्ली से वाराणसी चल रही वंदे भारत ट्रेन के चेयर कार का किराया करीब 1800 और एग्जीक्यूटिव कोच का 3 हजार रुपए से ज्यादा है।
इसमें 1120 रुपये बेस फेयर, 40 रुपए रिजर्वेशन चार्ज, 45 रुपए सुपर फास्ट चार्ज जोड़ा गया है। इसके अलावा 61 रुपये GST के देने होंगे और कैटरिंग चार्ज के 364 रुपए है। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के किराये में आईआरसीटीसी का कैटरिंग चार्ज शामिल होगा, हालांकि यात्रियों को भोजन न लेने का विकल्प नहीं दिया जाएगा।
जोधपुर को टेक्नोलॉजी पार्टनर स्कीम में किया शामिल
जोधपुर में भी ट्रेन शेड़्स की तैयारियां चल रही है। यहां टेक्नोलॉजी पार्टनर स्कीम के तहत वंदे भारत ट्रेनों का मेंटेनेंस किया जाएगा। इसके लिए निर्धारित प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। ट्रेन शेड्स भगत की कोठी पर बनेगा।
अलग डिपो व शेड्स की जरूरत
भारत में निर्मित सेमी हाई स्पीड ट्रेन अब तक की ट्रेनों से बिल्कुल अलग है। टेक्निकल ट्रेन होने से इसकी मेंटेनेंस भी अलग मशीनों से होगी। टेक्निकल स्टाफ को इन ट्रेन के अनुसार अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेन डेस्टिनेशन पर पहुंचने के बाद शेड्स व डिपो पर क्लीन होगी। इनके ऑटोमेटिक सिस्टम को चेक किया जाएगा, फिर दोबारा प्लेटफॉर्म पर यह खड़ी होगी।
भारत की सबसे पहली हाई स्पीड ट्रेन पहले गतिमान एक्सप्रेस को माना जाता है, जो 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है। ट्रेन को हजरत निजामुद्दीन से आगरा छावनी स्टेशन के बीच चलाया गया था। बाद में इस ट्रेन को आगरा से बढ़ाकर झांसी तक कर दिया गया। 2019 में शुरू हुई थी पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन।
मंडे स्पेशल180 की स्पीड, गिलास से पानी की बूंद नहीं गिरी:जयपुर से चार शहर के बीच दौड़ेगी वंदे भारत, 5 घंटे का सफर 3 घंटे में
















