
बागड़ी बोली के गीत राजस्थानी भाषा को दिलाएंगे मान और मान्यता :- पंकू गोदारा
हनुमानगढ़
भारत का सबसे बड़ा राज्य आज भी अपनी मायड़ भाषा राजस्थानी की मान्यता के लिए गिड़गिड़ा रहा है परंतु युवाओं ने पुराने ढर्रे को छोड़कर अपने स्तर पर राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए जी जान से जुटे हैं। राजस्थानी की मान्यता के लिए बागड़ी कलाकार कॉमेडी, गीत, संगीत, भजन आदि के माध्यम से जन जागरण का काम कर रहे हैं। हनुमानगढ़ जिले की बोलांवाली गांव के कलाकार पंकज गोदारा का गाया केसरिया निराला गीत खूब पसंद किया जा रहा है। इस गीत के गीतकार, गायक पंकू गोदारा व दर्शनसिंह हैं वही शायरी शेखर सहू की है। उदयपुर, राजसमंद, जैसलमेर, हनुमानगढ़ सहित अनेक जगहों पर इस गीत की शूटिंग हुई है। 5 जनवरी को यूट्यूब चैनल रॉर ऑफ बागड़ी पर इस गीत को रिलीज किया गया है। पंकज गोदारा ने बताया कि जब पंजाबी, हरियाणवी, हिंदी आदि गीतों को सुनते थे तो मन में यह दर्द हमेशा रहता था कि इतना बड़ा राजस्थान होने के बावजूद म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री यहां विकसित क्यों नहीं हुई ? 16 करोड़ राजस्थानीयों की पहचान दर दर की ठोकर क्यूं खा रही है?
पंकज गोदारा ने बताया कि बागड़ी बेल्ट के कलाकार अब धीरे-धीरे पंजाबी, हरियाणवी और हिंदी में काम करने के बजाय बागड़ी बोली में काम करके राजस्थानी भाषा को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि राजस्थानी कलाकारों को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट करें। राजस्थानी कलाकार राजस्थानी भाषा, संस्कृति, संस्कार जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं इसलिए हर राजस्थानी का फर्ज बनता है कि वह अपने कलाकारों को खुलकर समर्थन करें। राजस्थानी की मान्यता के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने से हर राजस्थानी को बहुत बड़ा फायदा होगा। मान्यता मिलने से होने वाले फायदे को हम गिना ही नहीं सकते। हमारे तीज त्योंहार, रीति रिवाज, संस्कार, पहनावा, खान-पान राजस्थानी भाषा पर ही टिका हुआ है। अगर राजस्थानी भाषा खत्म हो गई तो राजस्थानीयत ही खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अब राजस्थानी जनता जागी है और मान्यता भी मिलेगी।













