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गर्भपात को दी जाने वाली वैधानिक मान्यता को तुरंत निरस्त करना अत्यावश्यक – तिवाड़ी,राष्ट्रपति को लिखा पत्र

हमें गर्व है कि केन्द्र सरकार के कुशल नेतृत्व में जहाँ राष्ट्र प्रगति के नवीन आयाम स्थापित कर रहा है, वहीं निम्नांकित कुछ अवांछित निर्णय हमारी सनातन सामाजिक संरचना को दुष्प्रभावित कर रहे हैं

1. गर्भपात, जिसे हमारे सभी पुराणों ने महापाप बताया है, जिसके प्रायश्चित का भी कोई विधान नहीं है, उसे वैधानिक मान्यता प्रदान करना न केवल सामाजिक मूल्यों को धूल धूसरित कर रहा है वरन् व्याभिचार को भी बढ़ावा है। मान्यवर प्रत्येक गर्भपात में जीवित प्राणी की नृशसता पूर्वक हत्या होती है। गर्भपात प्रकृति विरुद्ध. अमानवीय, महापाप क्रूरता के साथ गर्भस्थ शिशु की हत्या है। अतः गर्भपात को दी जाने वाली वैधानिक मान्यता



को तुरंत निरस्त करना अत्यावश्यक है। 2. विवाहेतर संबंधों को वैधानिक मान्यता प्रदान करना, लिव इन रिलेशनशिप’ जैसे दुष्कृत्यों को बढ़ावा दे कर सुसंस्कृत समाज को पतन की ओर अग्रसर करना है। हाल ही अनेक घटनाएँ इसका प्रमाण है। अतः इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है।

3. पति-पत्नी के पवित्र संबंधों में स्वतंत्रता के नाम पर हाल ही सुप्रीम कोर्ट के निर्णय / निर्देशों ने रिश्तों में संघ

लगा कर सनातन सामाजिक मान्यताओं को सरासर क्षति पहुँचाने का कुप्रयास किया।



आपके साहसी नेतृत्व से अपेक्षा है कि आप राष्ट्र माता केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्रीजी को उक्त अशोभनीय कृत्यों पर तुरंत विराम लगा कर भारत की सनातन संस्कृति एवम् स्थापित परम्पराओं की रक्षा करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश एवम् कानून बनाने हेतु परामर्श की कृपा करें।

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Gordhan Soni

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