मुंबई में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी 22 नवंबर को प्रदान करेंगे भगवती दीक्षा

शांतिनिकेतन, गंगाशहर। मुमुक्षु धनराज बैद के गंगाशहर पधारने पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, गंगाशहर द्वारा उनके आगामी संयम जीवन की मंगल कामना हेतु अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। 77 वर्षीय श्री धनराज बैद राजलदेसर निवासी और दिल्ली प्रवासी हैं। आपका जीवन साधनामय है तथा भरा पुरा परिवार त्याग कर वैराग्य पथ

स्वीकार कर रहे हैं। अभिनंदन समारोह में उद्बोधन देते हुए शासनश्री साध्वी श्री शशिरेखा जी ने कहा कि भगवान महावीर ने कहा कि आत्मा शाश्वत है। श्री धनराज जी शाश्वत की प्राप्ति के लिए अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति की ओर अग्रसर हो रहे हैं। जब व्यक्ति का लक्ष्य अटल हो तो गुरु कृपा भी प्राप्त हो जाती है। श्री धनराज जी बैद प्रतिमाधारी श्रावक है। इस उम्र में संयमरत्न प्राप्त करने में पारिवारिक जनों में उनकी धर्मपत्नी, पुत्र, पुत्र वध, पोते-पोती सभी का योगदान है।साध्वी श्री ललितकला जी ने कहा कि साधुत्व स्वीकार करना बहुत दुर्लभ बात है। आत्मा का सार निकालने के लिए साधुत्व ग्रहण कर रहे हैं। आपका जीवन त्यागमय ह

है। सभी सुख-सुविधा त्याग कर संयम पथ स्वीकार कर रहे हैं। मुमुक्षु धनराज बैद ने अपने वक्तव्य में कहा कि बचपन के संस्कार आगे बहुत काम आते हैं। मुझे बचपन से ही धर्म संघ के संस्कार प्राप्त हुए हैं। अनेक साधु संतों की प्रेरणा प्राप्त हुई है। भारतीय संस्कृति में चार आश्रम है। चौथा आश्रम सन्यास आश्रम है। देव, गुरु व धर्म के प्रताप से मैं आगार धर्म से

अनगार धर्म की ओर बढ़ रहा हूं। तेरापंथी सभा के अध्यक्ष अमरचंद सोनी, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा संजू लालानी व तेरापंथ युवक परिषद के उपाध्यक्ष ललित राखेचा ने उनके संयम जीवन के प्रति मंगलकामना व्यक्त करते हुए अपने उद्गार रखे। सभा अध्यक्ष अमरचंद सोनी, सह मंत्री पवन छाजेड़, महिला मंडल अध्यक्ष संजू लालानी, युवक परिषद उपाध्यक्ष ललित राखेचा, मंत्री भरत गोलछा, वरिष्ठ श्रावक जीवराज सामसुखा ने धनराज जी बैद को जैन पताका व साहित्य से सम्मानित किया।














