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हम बहुत भाग्यशाली हैं की मंदिर बनता देख रहे हैं – रामकिशोर तिवारी (कार सेवक)


हमारे बुजुर्गों ने तो मंदिर टूटते देखे हैं परंतु हम भाग्यशाली हैं कि अपने जीवन काल में प्रभु श्री राम को अपने धाम में विराजमान देख सकेंगे ।


जब हमारे संवाददाता ने सक्रिय कार सेवक श्री राम किशोर तिवारी से यह पूछा कि आपको अयोध्या से प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण पत्र मिला है ? जवाब में श्री तिवारी ने व्यथित होकर कहा कि नीव के पत्थर हमेशा दब जाते हैं ,और कंगूरे ही दिखलाई पड़ते हैं ।
यहां उल्लेख करना जरूरी है कि तत्कालीन भाजपा जिला अध्यक्ष एवं वर्तमान में अखिल भारतीय गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवारी 1990 की प्रथम बार कार सेवा में 18 दिवस तक शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) की जेल में बतौर कार सेवक बंदी रहे ,कठोर यातना सही और दूसरी बार 1992 की सक्रिय कार सेवा में ढांचा ध्वस्थिकरण के दौरान जबरदस्त घायल हुए थे।


ज्यादा कुरेदने पर श्री तिवारी ने भाव विहल होकर बताया कि तत्कालीन नगर न्यास अध्यक्ष श्री कोठारी अपने चार न्यासियों के साथ कहीं दूर एक अखाड़ा आश्रम में जाकर ठहरे थे और मैं संघ के विभाग कार्यवाह महावीर सिंह जी यादव संघ के विभाग वरिष्ठ नेता घेवर जी जोशी, राजा बाबू दमाणी, संत नवल राम जी महाराज सहित अनेक लोगों के साथ कार सेवक पुरम टेंट में 8 दिन अयोध्या में रहा था जब मैं ढांचा ध्वस्थिकरण के दौरान चोटिल होकर गिरा तो न्यास सदस्य नंदकिशोर सोलंकी ने मुझे अन्य लोगों की सहायता से अस्थाई अस्पताल पहुंचाया।


लगभग 3 घंटे पश्चात होश आने पर माइक से सूचना प्रसारित कर टेंट से स्वदेशी जागरण मंच के धर्म प्रकाश शर्मा ,नरेंद्र भारद्वाज, माली बाबा, विभाग कार्यवाह महावीर सिंह जी यादव ने मुझे हाथों में उठाकर कार सेवक पुरम में मेरे टेंट तक पहुंचाया और अगले 24 घंटे तक श्री राजा बाबू दमानी ने डॉक्टरों की हिदायत के अनुसार मुझे पानी की जगह केवल शहद पिलाया।
दूसरे दिन चोटिल होने के बावजूद तत्कालीन राजस्थान सरकार के मंत्री श्री ललित किशोर चतुर्वेदी की अगुवाई में रामलला के अस्थाई मंदिर के निर्माण की कार सेवा भी की ।


एक प्रश्न के जवाब में श्री तिवारी ने बताया कि लाखों की भीड़ में ढांचा ध्वस्तीकरण कार सेवा मात्र 350 – 400 कार सेवकों द्वारा ही की गई थी और बीकानेर भाजपा के संगठन मंत्री परमानंद ओझा सक्रिय रूप से कार सेवा में साथ थे ।


जब तिवारी जी को निमंत्रण नहीं मिलने बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि संघ परिवार के तत्कालीन प्रचारक व अधिकारी अधिकाशतह स्वर्ग सिधार गए हैं जिन्हें सही जानकारी थी। आज संघ के प्रचारक व अधिकारी सच्चाई से अनभिज्ञ हैं भाजपा में जो कंगूरे आज दिखलाई पड़ते हैं इनका तब जन्म नहीं हुआ था या फिर राष्ट्रीय आंदोलन में उनकी भूमिका शून्य के बराबर थी। समाज में नैतिक मूल्यों का जिस प्रकार ह्रास हुआ है, भाजपा व संघ में भी समाज के ही लोग आए हैं।

श्री रामकिशोर तिवाड़ी

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Gordhan Soni

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