
हर साल की तरह इस साल भी दिव्यांग सेवा संस्थान बीकानेर द्वारा संचालित दिव्यांग शैक्षणिक स्कूल में मूक बधिर बालक बालिकाओं के साथ विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 2024 को मनाया गया।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत सुभाष यादव ने बताया कि यह दिन हिंदी भाषियों के योगदान का सम्मान करने, भाषा के महत्व को समझने और लोगों को इसके महत्व के बारे में बताने के लिए मनाया जाता है। ऐसे में हम सभी को मिलकर निर्धारित तिथि पर विश्व हिंदी दिवस मनाना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को इसके बारे में पता चले।
संस्थान संचालक जेठा राम ने मूक बधिर बच्चों को संकेत भाषा में बताते हुए कहां की 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहली बार हिंदी बोली गई थी। 2006 में देश के तत्कालीन प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पहला विश्व हिंदी दिवस मनाया था। तभी से 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस या विश्व हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। ऐसे में आपको भी इस तिथि को याद रखना चाहिेए। यदि आप जागरूकता पैदा करना चाहते हैं और युवा पीढ़ी को भाषा के बारे में अधिक जानकारी देना चाहते हैं तो इस दिन को मनाना महत्वपूर्ण है।
अध्यापक अजय कुमार ने मूक बधिर बालक बालिकाओं संकेत भाषा में बताया कि हिंदी को भारत सरकार की आधिकारिक भाषा माना जाता है। यह भारत संघ की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। आप भाषा के महत्व को बढ़ावा देकर और लोगों को अपने भाषणों, प्रदर्शनों, संगीत और थिएटर में हिंदी को शामिल करने के लिए प्रेरित करके विश्व हिंदी दिवस मना सकते हैं।
अध्यापक रोहित कुमार ने बताया कि हिंदी भारत में एक महत्वपूर्ण भाषा है और हर किसी को इस भाषा के बारे में खुद को और अधिक शिक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। विश्व के सांस्कृतिक और भाषाई पहलू में भी हिंदी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम में रवि कुमार, देवाराम, मनीराम आदि मौजूद रहे।












