बीकानेर दिव्यंग सेवा संस्थान बीकानेर में अपना आठवां स्थापना दिवस हर्ष उल्लास के साथ मनाया! संस्थान संचालक जेठा राम ने बताया कि दिव्यांग सेवा संस्थान की स्थापना 6 अप्रैल 2016 में मात्र तीन बच्चों के साथ की थी वर्तमान 65 बच्चे शिक्षा का लाभ ले रहे हैं। जेठा राम ने अपनी संपत्ति से और अब जन सहयोग से संस्थान संचालित है रहे हैं। और 8 सालो से प्रयास कर रहे हैं लेकिन राज्य सरकार से कोई अनुदान नही मिल रहा है।
ये जन सहयोग से ही संचालित है।

संस्थान संचालक जेठा राम को राज्य सरकार द्वारा दिव्यांग बच्चों के कार्यों के सराहनीय उपलब्धियों हेतु विशेष योग्यजन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
दिव्यांग सेवा संस्थान बीकानेर द्वारा संचालित दिव्यांग शैक्षणिक विद्यालय एक ऐसा स्कूल है जहाँ छात्रों को एक सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण में कल की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
*दिव्यांग बच्चों के सर्वोत्थान की अनोखी पहल*
सम्मानित देशवासियों दिव्यांग बच्चों की अंतर्निहित क्षमताओं, प्रतिभाओं, हुनर, कलाओं विशेष गुणों को निखार कर उनके शिक्षा, प्रशक्षिण, पुनर्वास व व्यवसाय से जोड़ने के लिए पूर्ण समर्पित संस्थान “दिव्यांग सेवा संस्थान, बीकानेर राज.” मूक बधिर, व मंदबुद्धि शारीरिक विकृतियों से ग्रस्त बच्चों को शिक्षा व रोजगार के अवसर देती है, खुद को अभिव्यक्त करने का, खुद को निखारने व तराशने का…इसी कड़ी में ये संस्थान प्रतिवर्ष में दिव्यांग बच्चों की प्रतिभाओं को पहचान दिलाने व स्वस्थ प्रतिष्पर्धा विकसित कर स्वपरिष्करण की भावना जागृत करने हेतु महोत्सव के रूप में एक टैलेंट शो का आयोजन करती है जिसमें बच्चे अपनी अभिनय नृत्य, पेंटिंग, मेंहदी, कुकिंग, स्कैचिंग, खेल आदि अन्य विविध कौशलों का प्रदर्शन करते हैं।
दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास को नए पंख देने हेतु इस संस्थान में अवश्य सम्मिलित हो… एक आत्मिक खुशी व विकसित देश की प्रगति में अपनी जिम्मेदारी निभाएं…।
शिक्षा प्रदान करना: दिव्यांग बच्चों की गरीबी के चक्र को तोड़ने में मदद करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके, व्यक्ति अपनी नौकरी की संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं और अपनी कमाई की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
पहले का समय बहुत मुश्किलों में बीता। हालात ऐसे थे कि पेटभर खाना मिलना भी आसान नहीं होता था। कभी पड़ोसियों से लाई गई छाछ से कढ़ी बनाई जाती, कभी पिसी हुई मिर्च के साथ रोटी खाई जाती तो कभी प्याज़ के साथ।
*उत्कृष्ट बोर्ड परिणाम पर गर्व और प्रसन्नता है।*
हमारे स्टाफ, छात्रों और अभिभावकों की कड़ी मेहनत से इसे संभव हो पाता। यह हमारे छात्रों को नए, कठिन शैक्षणिक मानकों को बढ़ाने के लिए सभी को साथ लेकर काम किया। घर पर अपने बच्चे को प्रोत्साहित करने और उसका समर्थन करने से, सफलता की संभावना काफी बढ़ती है।
आपणी फाउंडेशन के निदेशक समाजसेवी रामस्वरूप कूकणा, व अध्यक्ष एडवोकेट दयाराम कूकणा द्वारा दिव्यांग सेवा संस्थान को वेन गाड़ी भेंट की।
मंच संचालन डॉ. अमित पुरोहित ने किया।
कार्यक्रम में अतिथि नवीन जी मेघवाल निदेशक इंडोनेशिया, डॉ. विमला मेघवाल, डॉ.अंजना कोचर, करनाराम RTO अधिकारी, प्रमाराम जी कूकना, डॉ. रामलाल परिहार, रामस्वरूम कूकना, दयाराम जी, रतनलाल जी जीनगर, कूकना, विजय जी जैन, अलका जी पारीक, मधु जी जैन, फतेह सिंह जी सोढा, आशीष जी चांदना, महावीर जी डागा, दातार सिंह, रोहिताश कांटिया, दीनदयाल जनागल, बाबूलाल जी जनागल, भवानी शंकर, गोपाल जी बारूपाल, एडवोकेट महेंद्र बारूपाल, संतोष महाराज, सुभाष यादव, कविता यादव, भुनेश यादव, सरस्वती भार्गव, ओमप्रकाश बलायच, अशोक बिश्नोई, अजय कुमार, राजेश कुमार, रोहित कुमार आदि मौजूद रहे।














