
‘म्हारी गणगौर’ में बार कोड स्कैनर के जरिये गणगौर गीत ऑडियो उपलब्ध 'रमक झमक' द्वारा बनाई गई 'म्हारी गणगौर'पुस्तक में दिए गए बार कोड व लिंक दिया गया है जिसको स्कैन करने से गणगौर गीत का ऑडियो चालू हो जाता है। अभी गणगौर पूजन उत्सव चल रहा है इसलिये इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अभी देशभर में पौराणिक गीत सुने जाने लगे है। पुस्तक के सम्पादक प्रहलाद ओझा 'भैरुं'ने बताया कि पुस्तक में सुबह दोपहर शाम व रात को गाए जाने वाले पौराणिक परम्परागत गीत का संकलन है उसमें से कई गीतों को बिना साज वाद्य के जैसे सुबह से शाम तक बालिकाएं सुहागिनें जिस प्रकार गाती है उसे उसी रूप में ऑडियो रिकार्ड कर बार कोड पुस्तक में दिया गया है जिसको स्कैन कर सुने जाने से उसकी राग लेने में आसानी होती है। चूंकि अभी गणगौर उत्सव चालू है और आज देशभर में जिन लोगों को पुस्तक नहीं भी मिली उन्होंने कोड एक दूसरे को शेयर कर गीत की राग भेजी व गीत ऑडियो सुना। जिनके कॉल आ रहे है उनको भी वॉट्सप पर बार कोड व म्हारी गणगौर गीत का लिंक भेजा जा रहा है। ओझा ने बताया की विगत गवर मेले पर वरिष्ठ साहित्यकार स्व शिवराज जी छंगाणी ने ही यह सुझाव दिया था। फ़िल्मी उटपटांग गीत की जगह गवर के परम्परागत गीत तब ही गाए जा सकेंगे जब किताब के साथ उनको ऑडियो के माध्यम से वो कड़ी भी सुनने को मिले। ओझा बताते है कि छंगाणी के कहने पर बालिकाओं व महिलाओं ने जैसे गीत गाए उसी शैली में रिकॉर्ड कर लिंक व कोड म्हारी गणगौर में दिया गया है।इस किताब में 'सुरीला पर्व गणगौर का सम्पूर्ण विश्लेषण है जिसमे गवर व इसर गीत के साथ पूजन व्रत उजाणा कथा कहानी आरती शामिल है।

हाल ही में इसका लोकार्पण इतिहासकार डॉ बी एल भादाणी,लोक गायिका पदमा व्यास,मोनिका गौड़,डॉ रेणुका व्यास,रामकवरी ओझा व लक्ष्मी ओझा द्वारा किया गया।















