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चेटीचंड महोत्सव विशेष युवा पीढ़ी कर रही बीकानेर सिंधी समाज की विरासत का संरक्षण और संवर्धन

✍️- मोहन थानवी

आज एक से आठ हुए झूलेलाल जी के मंदिरों में प्रतिदिन आरती अरदास और भजन कीर्तन किए जाते हैं।

बीकानेर सिंधी समाज के युवाओं को लखदाद है क्योंकि वह अपने इष्ट देव संत झूलेलाल का संदेश ‘जीव-जन्तु व पसूं पखण, सभ में सागियो साहु/साहु सताइण, खून खां, जाणो वडो गुनाहु’ को अपने जीवन में आत्मसात कर चुकी है। बताते चलें कि इस संदेश का हिंदी रूपांतरण इस तरह से कहा जाता है – जीव जंतु और पशु पक्षी सब में एक ही प्राण, शोषण करना मानो हत्या से भी बड़ा अपराध है। जाहिर है संदेश का मर्म सेवा भाव में निहित है। इसी सेवा भाव से समृद्ध है बीकानेर सिंधी समाज। विशेष कर पुरोधाओं की तपस्या और सिंधु संस्कारों से युक्त आज की युवा पीढ़ी सेवा कार्यों में तो आगे है ही अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने में भी पीछे नहीं है। बल्कि युवा पीढ़ी ने अपने पुरोधाओं के सपनों को साकार करते हुए बीकानेर में सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों को विस्तारित किया है। इसका प्रमाण है बीकानेर में सिंधी समाज के आरंभिक काल 1940 के बाद से अब तक की विकास यात्रा। इस यात्रा में बीकानेर के नजदीकी रतनगढ, चूरू, सूरतगढ़ सहित बीकानेर के आसपास के कस्बे श्री कोलायत श्री डूंगरगढ़ नोखा लूनकरणसर, घड़साना, खाजुवाला, बज्जू आदि में बसने वाले सिंधी परिवारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री डूंगरगढ़ में तो सिंधी धर्मशाला और झूलेलाल जी के मंदिर के आयोजन बीकानेर के आयोजनों के साथ -साथ राज्य भर में चर्चित रहते हैं।

एयरफोर्स और बैंक आफ इंडिया में सेवाएं दे चुके भारतीय सिंधु सभा के संभाग संरक्षक श्याम आहूजा के शब्दों में – विभाजन के पश्चात बीकानेर आये विस्थापितों ने कमर कस कर सभी को रहने हेतू निवास की प्रक्रिया पर शक्ति केंद्रित की और श्रीमती कान्ता खतुरिया, रांझामल खतुरिया, माधव दास आहूजा, झांगीराम जी(स्व देवीचंद जी के पिताजी ),लक्ष्मण दास ऐलानी, दादा जयसिंघानी, आदि ने जीवट से काम लेकर समाज जनों की हर समस्या कानूनन, क्लेम की राशि, अन्य हर प्रकार की अडचनों का निवारण कर ऐसी नींव तैयार की जिस पर वर्तमान सिंधी समाज की सुदृढ़ इमारत ख़डी है।

पुरौधा तेजूमल सदारंगानी, आत्माराम आहूजा, टीकमदास आदि के मार्गदर्शन में झूलेलालजीजी के मंदिर से सजे धजे बहराणा साहब के नगर भ्रमण, कलशयात्रा और पब्लिक पार्क तथा धोबीतलाई में जल में ज्योति विसर्जन अनुष्ठान में परंपरा रही है। स्व. माधव दास आहूजा, स्व मोहन लाल आहूजा द्वारा चलाए गए सिंधु जागृति अभियान, हरूमल महावीर आप्टिकल वाले का मटका वादन, स्व चंद्रप्रकाश आहूजा की सेवाएं, स्व पीतांबरदास पुरोहित व दामोदर दास व्यास परिवार के भजन कीर्तन की संगत, और स्व मनोहर कलांश पुरोहित के द्वारा झूलेलालजी की मूर्ति सहित मंदिर में पेंटिंग से शृंगार की सेवा, स्व राधाकृष्ण चांदवानी द्वारा सिंधी साहित्य सेवाएं, शोभराज आसवानी की सक्रियता, स्व देवीचंद खत्री द्वारा समाजोत्थान के लिए सिंधी समाचार पत्र प्रकाशन सहित विभिन्न गतिविधियों, पवनपुरी और परदेशियों की बगेची में हीरालाल रिझवानी के विकास कार्यों और मोहन हिंदुस्तानी के रंगकर्म को समाज भूल नहीं सकता।

साथ ही सिंधी मास्टर वीरूमल परिवार, स्व शिवलदास खतूरिया, मुखी लेखूमल रामनानी , गोविन्दराम बारूदवाले, मानूमल जी, साधु वासवानी सेंटर के सेवादार भरत बालानी, हरीश बालानी, चोइथराम आचार्य, धनाराम चैनाराम गोरवानी, अर्जुनदास जी साईं मंदिर वाले, वासु अंडेवाले परिवार ऐसे परिवारों में शामिल हैं जिनके बीकानेर सिन्धी समाज विकास यात्रा में मिले सहयोग को हमेशा याद रखा जाएगा।

आहूजा आगे बताते हैं कि समाज में कार्यरत सभी संस्थाओं के वरिष्ठ जनों का आपसी विचार विमर्श के बाद ये महसूस किया गया कि भविष्य के लिए समाज के युवा कार्यकर्ताओं की 2nd लाइन को भी तैयार किया जाये इसी संदर्भ में योजना बद्ध तरीके से नई पीढ़ी को नये दायित्वों के साथ आगे लाया गया जिसमे विजय ऐलानी, विजय धिरानी, राजेश केशवानी, पवन खत्री, अशोक वासवानी, अनिल डेम्बला, जामन लाल गजरा, कैलाश ग्वालानी, अनिल रिझवानी, टीकम पारवानी, तेज प्रकाश, प्रेम मामनानी, घनश्याम सदारंगानी, नीता सामनानी, राजू मूलचंदानी,वर्षा लखानी, पूनम टिकयानी,गणेश सदारंगानी,सुरेश केशवानी, हरीश रुपानी आदि नाम उल्लेखनीय हैं।

मातृ शक्ति में भी नई प्रतिभाये भारती ग्वालानी कान्ता हेमनानी, वीणा बादलानी, यशोदा पारवानी आदि नई ऊर्जावान कार्यकर्त्ता के रूप में स्थापित हुई।

आज समाज की संस्कृति, भाषा व सांस्कृतिक प्रतिमानों को विभिन्न कार्यक्रमों, आयोजनों, बाल संस्कार शिविरों, आदि के साथ आगे ले जाने में सक्षम हो गई हैं।

यह सर्वविदित है कि अमरलाल मंदिर ट्रस्ट रथखाना से आगाज करते हुए समाज आज पवनपुरी एवं संत कंवरराम सिंधी समाज ट्रस्ट धोबीतलाई के मंदिरों में भी अनेकानेक अनुष्ठान संपन्न करता है। संत कंवररम मंदिर रथखाना, साईंबाबा मंदिर सुदर्शनानगर, खत्री मोदी समाज के द्वारा लक्ष्मीनारायण मंदिर, पंजाबी समाज द्वारा फड़बाजार, झूलेलाल मंदिर रथखाना और परदेशियों की बगेची में भी झूलेलाल जी की मूर्तियां प्रतिष्ठापित हैं।

इससे इतर मुक्ता प्रसाद नगर, लालगढ़, वल्लभ गार्डन आदि क्षेत्रों में भी समाज के आयोजन होते रहते हैं। ऐसे आयोजनों में चेटीचंड, असुचंड, और चालिहा महोत्सव तथा भारतीय सिंधु सभा, सिंधी साहित्य समिति, संत कंवर राम सिंधी धर्मशाला धोबी तलाई, संत कंवर राम मंदिर रथखाना साधु वासवानी भवन रथखाना नवयुवक कला मंडल के सिंधी नाटकों सहित समाज के विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख रूप से शामिल है।

आज एक से आठ हुए झूलेलाल जी के आठ मंदिरों में प्रतिदिन आरती अरदास और भजन कीर्तन किए जाते हैं। समाज के प्रेरणा पुरूषों के मार्गदर्शन में बीकानेर में आरंभ हुई इस परम्परा को आज की युवा पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। सजे धजे बहराणा साहब के नगर भ्रमण, कलशयात्रा और पब्लिक पार्क तथा धोबीतलाई में जल में ज्योति विसर्जन अनुष्ठान की परंपरा को निर्वहन किया जाता है। चेटीचंड महोत्सव और सिंधी भाषा दिवस समारोह संयुक्त रूप से मनाते हैं। और समाज के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर तय गाइडलाइन के मुताबिक हर बार 16 जुलाई से चालिहा महोत्सव का आगाज और 24 अगस्त को पूर्णाहुति होती है। ऐसे आयोजनों के मूल में है कि सभी समाजजन एकजुट हो भागीदारी निभाते रहें।

सर्व विदित है कि बीकानेर में आरंभिक काल में सिंधी समाज को अपने इष्ट देव अमरलाल जी अर्थात झूलेलाल जी का मंदिर स्थापित करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। लेकिन आस्था के सागर में आकंठ सिंधी समाज के तत्कालीन युवाओं ने तन मन धन से भक्ति भाव के साथ बीड़ा हाथ में लिया और परिणाम स्वरुप झूलेलाल जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। यहीं से आरंभ हुई बीकानेर सिंधी समाज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विकास यात्रा की।

चेटीचंड महोत्सव : हमारी विरासत

सिन्धी समाज के पर्व-त्योहारों में प्रमुख चेटीचंड के दिन झूलेलाल जी के मंदिरों में मेला भरता है। अलसुबह से पूजा-अर्चना का दौर शुरू होता है जो संध्याकाल में महाआरती के बाद पूज बहराणा साहिब की ज्योति का जल में विसर्जन के साथ पूर्ण होता है। सांस्कृतिक आयोजनों में सिन्धी लोकनृत्य, भजन, लोकगीतों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। सिन्धी महापुरुषों, संतों और सिन्धी रत्नों की सचेतन झांकियां सजाकर शहर के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली जाती है। ‘जे को चवन्दो झूलेलाल तहिंजा थीन्दा बेड़ा पार’ का जयघोष करते हैं। सिन्धी लोकनृत्य ‘छेज’ में शामिल होने के लिए तो समाज का हर व्यक्ति लालायित रहता है। शहीद हेमू कालाणी, संत कंवरराम, स्वामी टेउराम, संत साधु वासवानी, स्वामी शांतिप्रकाश, स्वामी सर्वानंद, स्वामी गुरुमुखदास, स्वामी ग्वालानंद, स्वामी बसंताराम, स्वामी हरिदासराम, स्वामी देवप्रकाश, स्वामी भगत प्रकाश का स्मरण कर सिन्धी समाज के लिए सुख-समृद्धि की कामना झूलेलाल से की जाती है। पल्लव डालकर अरदास की जाती है। समग्र समाज सामूहिक भंडारा में छोले-चावल का बना प्रसाद ग्रहण करता है। इसके साथ ही चेटीचंड महोत्सव के उपलक्ष्य में समाज की विभिन्न संस्थाएं सिन्धी नाटकों का मंचन, पुस्तक प्रदर्शनी, समाज की प्रतिभाओं और वरिष्ठजनों को सम्मानित करते हैं। संत झूलेलाल का संदेश ‘जीव-जन्तु व पसूं पखण, सभ में सागियो साहु/साहु सताइण, खून खां, जाणो वडो गुनाहु।’ समाज का हर व्यक्ति अपने जीवन में उतार चुका है।

साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक झूलेलाल का संदेश विश्वजन को सदैव आपसी भाईचारा और प्रेम-सौहार्द से जीवनयापन के लिए प्रेरित करता रहेगा।

इष्टदेव झूलेलाल जी का प्राकट्य

मान्यताओं के अनुसार, झूलेलाल वरुण देव के अवतार हैं. सिंध के शासक मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्ति के लिए सिंधी समाज ने 40 दिन तक तप-उपवास किया था. तब भगवान झूलेलाल सिंधु नदी में पलो मछली पर सवार हो प्रकट हुए और उनको कहा कि आज से 40 दिन बाद जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे।

यही वजह है कि सिंधी समाज 40 दिन तक झूलेलाल के अवतरण की प्रतीक्षा के दौरान की गई तपस्या के प्रतीक स्वरूप चालिया महोत्सव मनाता है। यूं झूलेलाल जयंती अथवा चेटी चंड नवसंवत के चंद दर्शन के दिन मनाई जाती है क्योंकि वचन के मुताबिक झूलेलाल ने उसी दिन जन्म लिया। भगवान झूलेलाल का असली नाम उदयचंद है, वे वरुण देव के अवतार माने जाते हैं।

पुरौधाओं का आशीर्वाद है युवाओं को

शिवाजी आहूजा, रमेश आहूजा की धार्मिक सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले सतत कार्य, पवन देवानी, लालचंद तुलसियानी, पीतांबर सोनी की साहित्यिक सांस्कृतिक गतिशीलता, नानक हिंदुस्तानी, सुरेश हिंदुस्तानी के नाटक और सांस्कृतिक आयोजन, मोहन थानवी द्वारा विश्वास वाचनालय माध्यम से सिंधी शिक्षा का प्रचार-प्रसार कार्य, तथा धोबीतलाई में भारतीय सिन्धु सभा महानगर एवं सहयोगी संस्थाओं के पदाधिकारियों श्याम आहूजा, किशन सदारंगानी, भारती ग्वालानी, कमलेश सत्यानी विजय ऐलानी, दौलतराम रीझूमल, सोनूराज आसूदानी एवं मातृ शक्ति की भारती गुवालानी, टीकम पारवानी, सतीश रीझवानी, राजू मोटवानी, कमला सदारंगानी, रूकमणी वलीरमानी, वीणा बादलानी, दिलीप मनसुखानी, हंसराज मूलचंदानी, प्रेम मामनानी, तेज प्रकाश वलीरमानी, राजकुमार वलीरमानी, पार्षद जामन लाल गजरा, दीपक आहूजा, ढालीराम, घनश्याम सदारंगानी, हरीश पंजाबी, हेमंत गोरवानी, नीता सामनानी, कांता हेमनानी, सिन्धी सेन्ट्रल पंचायत के पूर्व अध्यक्ष खेमचंद मूलचंदानी, राजू मूलचंदानी, हासानंद मंघवानी, मानसिंह मामनानी, मुक्ता प्रसाद नगर में किशोर टिकयानी, कैलाश गुवालानी, भरत गुवालानी, के कुमार आहूजा, विवेक आहूजा, केशव खत्री, लक्ष्मण किशनानी, सुरेश केशवानी, केशव खत्री, यशोदा पारवानी, वर्षा लखानी व पूनम टिकयानी भारतीय सिंधु सभा महानगर अध्यक्ष किशन सदारंगानी, अनिल डेम्बला, सुरेश केशवानी सहित ऐसे और सिंधु सेवक हैं जो बीकानेर में सिंधीयत की अखंड ज्योत और पताका को थामे आग आगे और आगे बढ़ रहे हैं। विकास यात्रा में हर सिंधी परिवार की सहभागिता उल्लेखनीय है जिसे हमने रेखांकित करने का भरसक प्रयास किया है। फिर भी संभव है बहुत से व्यक्तित्व यहां रेखांकित करने से हम चूक गए हों, अतः हम विनम्रता से समाज से क्षमा याचना चाहते हैं। जय झूलेलाल।

श्याम आहूजा
संभाग संरक्षक
भारतीय सिंधु सभा बीकानेर
मोबाइल नं 9413726126

Picture of दिलीप गुप्ता

दिलीप गुप्ता

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