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राष्ट्रसंत, डॉ. आचार्य प्रवर श्री दिव्यानंद सूरीश्वर महाराज साहब ( निराले बाबा) के मुखारबिंद से गंगाशहर में सेठिया भवन में चल रही भगवान श्री महावीर कथा

बीकानेर दिनांक 10अप्रैल 2024
राष्ट्रसंत, डॉ. आचार्य प्रवर श्री दिव्यानंद सूरीश्वर महाराज साहब ( निराले बाबा) के मुखारबिंद से
गंगाशहर में सेठिया भवन में चल रही भगवान श्री महावीर कथा के दौरान श्री ऋषभदेव भगवान का विवेचन, श्री पार्श्वनाथ भगवान का विवेचन के बाद श्री नेमीनाथ भगवान का जन्म महोत्सव के बाद श्री नेमीनाथ भगवान की बारात का आयोजन भव्यातिभव्य रूप सुसम्मपन्न हुआ। श्री नेमीनाथ भगवान बनने का सौभाग्य श्री विजय राज बोथरा ने एवं राजुल बनने का सौभाग्य श्री आशुराम सैन ने प्राप्त किया। ढोल बैंड बाजे के साथा श्री नेमीनाथ भगवान सजी धजी घोड़ी पर सवार होकर महावीर चौक आदि होते हुए सेठिया भवन पहुंची।
फिर दिव्यानंद निराले बाबा के मुखारबिंद से मंगलाचरण से सामूहिक नमस्कार महामंत्र का उच्चारण किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिव्यानंद निराले बाबा ने
बताया कि श्री नेमीनाथ भगवान जब बारात लेकर राजुल रानी के यहाँ पर पहुंचे तो बरातियों के लिए जो भोजन बनना था उसमें जीव हिंसा हो रही है तो मै शादी नहीं करूंगा बारात वापस ले चले गये और प्रभु ने( दीक्षा) संन्यास ले लिया उसके बाद आत्मिक साधना करके मोक्ष पद को प्राप्त किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशाल नाहटा ने बताया कि भगवान श्री महावीर कथा के दौरान माता श्री त्रिशला रानी को 14 स्वप्न दिखाये जायेंगे उसके बाद प्रभु महावीर को झूले में झूलाया जायेगा। भव्यातिभव्य रूप भगवान महावीर का जन्म महोत्सव मनाया जायेगा।
इस अवसर पर नवरत्न संचेती ने विचार प्रस्तुत कर ते हुए कहा कि बीकानेर गंगाशहर भीनासर आदि क्षेत्रो के प्रभु एवं गुरू भक्त का परम सौभाग्य है कि जिंदगी का परम सौभाग्य है कि हमको भगवान श्री महावीर कथा पहली बार सुनने का सौभाग्य मिला है और हम सभी इस आयोजन का भरपूर आनंद ले रहे।


इस अवसर पर सम्पत सेठिया ,लहर चंद सिपाणी,शिखर चंद सिपाणी, जितेन्द्र सिपाणी, पान मल मिनी, प्रेम कुमार मिनी, जयचंद लाल बोथरा, कौशल संचेती , पुष्पा देवी बोथरा, किरण देवी बोथरा, शर्मिला नाहटा, संगीता बैद, सुनीता रांका, कुसुम देवी बैद, कंचन बैद, मंजु बैद, सिम्पी बैद, कंचन बैद, संतोष देवी बैद, अनीता देवी बैद, सरिता बैद, सम्पत लाल सुराणा, जयचंद लाल सेठिया, तारा देवी बोथरा, आदि अनेकानेक भक्त गण मौजूद थे ।

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Prakash Samsukha

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