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पूर्णानन्द जी महाराज की 58 वीं बरसी पर पूजन, हवन भण्डारे के साथ कथा का हुआ समापन गीता पाठ साक्षात नारायण की वाणी है- श्यामसुंदर महाराज

बीकानेर। सेठ बंशीलाल राठी की बगेची में महायोगी अवधूत संत पूर्णानन्द जी महाराज की 58 वीं बरसी पर आयोजित की गई पद्म पुराण कथा का बुधवार को अंतिम दिन रहा। जहां व्यासपीठ पर विराजे कथावाचक

श्यामसुंदर महाराज ने आज की कथा में भगवत भजन की महिमा और प्रसंगो के साथ वर्ष भर मनाई जाने वाली संपूर्ण एकादशी की महिमा बताई। महाराज जी ने किसी एकादशी से कौनसा फल मिलता है और कथा के खंडन से होने वाले दोषों से अवगत कराते हुए कथा का पालन पूर्ण मनोयोग से करने की बात कही। साथ ही बताया कि कोई भी एकादशी की कथा करें लेकिन उस दिन सत्संग और हरि कीर्तन करना ना भूलें, विशेष रूप से रात्रि के चार प्रहर में व्रत की पालना करते हुए कीर्तन किया जाता है तो उस व्रत का चार गुणा फल प्राप्त होता है।
आयोजनकर्ता गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि इससे पूर्व सेठ बंशीलाल जी की बगेची में पूर्णानन्द जी महाराज के मंदिर में पूरे दिन धार्मिक आयोजनों की बाहर रही। सुबह बापजी महाराज का पूजन करने के साथ उनके नाम का पुण्य स्मरण किया गया। सुबह धर्मप्रेमी बंधुओं ने यज्ञ में आहूति देकर सनातन धर्म की रक्षा, विश्व कल्याण की कामना की। कथा विश्राम के बाद बापजी को प्रसाद भोग लगाकर भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी बंधुओं ने प्रसाद का लाभ लिया। शाम को भव्य आरती के साथ पूजन का कार्यक्रम हुआ। इस दौरान विभिन्न स्थानों से आए संत महात्मा ने धर्म स्थल पर आकर बापजी का आशीर्वाद लिया।

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दिलीप गुप्ता

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