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बाल-विवाह-चायनीज मांझा कानूनी अभिशाप – नम्रता

                 अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त पर बाल विवाह बहुतायत होते हैं। राजस्थान में इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए कानूनी रोक लगी हुई है फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षा के कारण बाल-विवाह जारी है।
जन-जागरूकता अभियानों द्वारा इसकी कमी आई है। आमजन को जागरूक होकर बाल-विवाह सरीखे कानूनी जुर्म को रोकने की पहल करनी चाहिए-वृष्णी
सामाजिक कार्यकर्ता भूरमल सोनी, प्रणाम द्वारा तैयार कि गई पतंगों पर विभिन्न स्लोगन -बाल विवाह अभिशाप है,कम उम्र में शादी, जीवन बर्बादी तथा जल बचत,पर्यावरण संरक्षण,चाइनीज मांझे का इस्तेमाल वर्जित है लिखकर जागरूकता अभियान का आज जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने श्लोगन अंकित पतंगों का अवलोकन कर सराहना करते हुए कहा कि समाज में जागरूकता से ही इस कुरितियो पर अंकुश संभव है। उन्होंने महावीर कुमार सहदेव,bकनक, कंचन,रवि राजा , वैदिक व लक्ष्मण लिच्छू आदि बच्चों को पतंगों का वितरण कर  चायनीज मांझा उपयोग न करने व बाल-विवाह नहीं करने पर संकल्प दिलवाया।
चौखूंटी पुलिया पर कुछ दिन पूर्व चाइनीज़ मांझे की चपेट आने से गर्दन कटे घायल को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाकर इलाज करवाने वाले लक्ष्मण लिच्छू को धन्यवाद दिया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलो के दोनों ओर लगे विद्युत पोल पर तारबंदी करवाने का आग्रह किया ताकि वाहन चालक व आमजन जानलेवा मांझे से सुरक्षित हो सके। इलाज में देरी न हो इसके लिए राजकीय सेटेलाइट अस्पताल में अस्थाई आपातकालीन वार्ड व चिकित्सक की व्यवस्था की मांग भी रखी।
चाईनीज मांझा जन-जागरूकता अभियान के अनुसार लोगों को पोस्टर्स में चपेट में आये घायलों के फोटो सहित दर्शाकर तथा कानूनी जानकारी की अपील की गई है।
आमजन अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें ताकि मांझे से किसी को नुक्सान नहीं हो।

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Gordhan Soni

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