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वीर शासन स्थापना दिवस पर नृत्य नाटिका व प्रवचन,’’जिन दर्शन से निज दर्शन’’ कार्यक्रम


बीकानेर, 19 मई। वैशाख सुदि एकादशी रविवार को जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की विचक्षण ज्योति, प्रवर्तिनी साध्वीश्री विजय प्रभा, चंदन बालाश्रीजी, मृगावतीश्री व प्रभंजनाश्रीजी आदि ठाणा के रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में वीर शासन स्थापना दिवस पर ध्वज वंदन, धार्मिक नृत्य नाटिका व प्रवचन के आयोजन हुए।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा ने बताया कि कार्यक्रम में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ व श्री जिनेश्वर युवक परिषद, अखिल भारतीय जैन, जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ युवा परिषद की स्थानीय इकाई से सम्बद्ध ज्ञान वाटिका के बच्चों, विचक्षण महिला मंडल, सामयिक मंडल का भी सहयोग रहा। सोमवार से सुबह छह बजे चलो ’’जिन दर्शन से निज दर्शन’’ कार्यक्रम साध्वीवृंद के सान्निध्य में शुरू किया जाएगा। पहले दिन सुगनजी महाराज के उपासरे से समूह के रूप में नाहटा चौक के भगवान आदि नाथ मंदिर में दर्शन वंदन व भक्तामर का पाठ किया जाएगा। सुगनजी महाराज के उपासरे में ही बच्चों का दस दिवसीय विशेष शिविर सुबह नौ से शुरू होगा।


वीर शासन स्थापना दिवस पर हुए कार्यक्रम में जैन ज्ञान वाटिका के बच्चों ने सुनीता नाहटा व टिविन्कल नाहटा के नेतृत्व में ’’जिन शासन अमर रहे’’, ’’जैन धर्म महान’’ व जैनम जयति शासनम्’’ तीन नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की जिसमें करीब 24 बच्चों ने एक सी पोशाक में जैन पंचरंगी ध्वज लिए हुए दुपटा पहने हुए हिस्सा लिया । नृत्य नाटिकाओं में बताया कि वैशाख सुदी 10 को बिहार क्षेत्र की ऋजुबालिका नदी के किनार 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर को केवल्य ज्ञान प्राप्त हुआ, तब देवताओं ने समवसरण की रचना की। इसमें मनुष्यों के नहीं पहुंचने पर वैशाख सुदी 11 को प्रभु महावीर ने सदुपदेश से मनुष्य को देशविरति धर्म का उपदेश दिया तथा शासन की स्थापना की। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह व ब्रह्मचर्य के पांच सिद्धान्त दिए तथा साधु, साध्वी, श्रावक-श्राविका की स्थापना की। इनमें गौतम स्वामी जैसे पंच महाव्रतधारी साधु, चंदनबाला जैसी साध्वी, आनंद श्रावक जैसे अणुव्रतधारी श्रावक व सुलसा रेवती जैसी धर्मनिष्ठ श्राविकाएं हुई। उन्होंने साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाओं के व्रत के नियम दिए । टिविन्कल नाहटा,खुशहाली जैन व हर्षिता जैन व ज्ञान वाटिका के बच्चों ने पंचरंगी जैन ध्वज फहराते हुए नृत्य किया। बच्चों ने मंगलाचरण व गुरुवंदन भी जैन विधि अनुसार किया।
साध्वीश्री चंदन बाला ने प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर ने चराचर जीवों की रक्षा तथा आत्म कल्याण के लिए जैन धर्म की स्थापना की। जैन धर्म के सिद्धान्त व नियम तथा दिनचर्या सभी के लिए कल्याणकारी, हितकारी व परोपकारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में जिन शासन के बीजारोपण, युवाओं में जैन धर्म के प्रति समर्पण व जागरूता से ही वीर-महावीर भगवान के शासन की शोभा में श्रीवृद्धि होगी। साध्वीश्री मृगावती भगवान महावीर का शासन पांचवें आरे तक साधु-साध्विंयों, श्रावक-श्राविकाओं के व्रत की पालना से स्थापित रहेगा। सप्त व्यसनों और कमियों व बुराइयों का त्याग कर अपने हृदय व मन मंदिर में परमात्मा की स्थापना करें। साध्वीश्री नित्योदया ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति को त्याग कर आर्य संस्कृति को अपनाएं। साध्वीश्री चिन्मयाश्री, विचक्षण महिला मंडल, कुशल दुगड़, मधु जैन, गीतिका, बालक पूनम जैन ने स्वरचित शासन गीत ’’जैन ध्वज लहराएं’’ प्रस्तुत किया। श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा, वरिष्ठ श्रावक विमल सुराणा ने आयम्बिल तपस्वियों का अभिनंदन किया। जिनेश्वर युवक परिषद के मंत्री मनीष नाहटा ने जिन शासन स्थापना दिवस की विस्तृत जानकारी दी।

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Prakash Samsukha

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