Bikaner Live

6 माह में 400 आरटीआई दाखिल करने पर व्यक्ति पर 3 लाख रुपये का अर्थदंड



बीकानेर में एक व्यक्ति द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) का अतिरेक उपयोग करते हुए 6 महीनों में 400 आरटीआई आवेदन दाखिल करने का मामला सामने आया है। इस मामले में रीको (राजस्थान औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम) को जवाब देने में अपने संसाधनों का अत्यधिक उपयोग करना पड़ा, जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ। अंततः इस अनावश्यक अपीलों की बाढ़ के परिणामस्वरूप रीको ने संबंधित व्यक्ति पर 3 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है, जो संभवतः राजस्थान में अपनी तरह का पहला मामला है।

### **आरटीआई का दुरुपयोग और सरकारी राजस्व का नुकसान:**
इस मामले में नारायण दास तुलसानी नामक व्यक्ति ने 6 महीनों में 400 आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किए, जिनमें से कई आवेदनों का कोई ठोस आधार नहीं था। तुलसानी ने रीको द्वारा भूखंड निरस्तीकरण के बाद यह आरटीआई दायर की थी, जिसमें उन्होंने विभिन्न अधिकारियों और सरकारी एजेंसियों से बार-बार जानकारी मांगी। इसके परिणामस्वरूप रीको के कर्मचारियों का अधिकतर समय इन आवेदनों का जवाब देने में व्यतीत हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार, रीको के एक कर्मचारी का 80% समय सिर्फ इन आरटीआई के जवाब देने में चला गया, जबकि 50% अन्य कर्मचारी इस मामले में लगे रहे।

### **रीको द्वारा लिया गया कड़ा कदम:**
रीको के राज्य लोक सूचना अधिकारी और क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तुलसानी को 3 लाख रुपये का अर्थदंड भरने का आदेश जारी किया है। रीको ने स्पष्ट किया है कि तुलसानी के अत्यधिक आरटीआई आवेदनों और अपीलों से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है और कार्यालय के कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव पड़ा है। साथ ही, कार्यालय के वातावरण में भय और चिंता का माहौल उत्पन्न हुआ, जिससे कामकाज प्रभावित हुआ।

### **तुलसानी पर लगाए गए आरोप:**
तुलसानी पर यह आरोप है कि उन्होंने रीको द्वारा निरस्त किए गए भूखंड के मामले में जानकारी प्राप्त करने के लिए नियमों का दुरुपयोग किया। उन्होंने अन्य आवंटित भूखंडों से संबंधित भी सूचना मांगी और तृतीय पक्ष की जानकारी पाने के लिए अनावश्यक दबाव डाला। तुलसानी ने विभिन्न उच्चाधिकारियों को भी अपनी अपील की प्रतियां भेजीं, जिसमें राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, संभागीय आयुक्त, और कई अन्य अधिकारी शामिल थे।

### **मामला:**
तुलसानी को रीको द्वारा करणीनगर औद्योगिक क्षेत्र में रियायती दर पर 29893 वर्गमीटर का भूखंड आवंटित किया गया था। इसके तहत तुलसानी को 39.62 करोड़ रुपये का निवेश करना था, जिससे राज्य के औद्योगिक विकास को बल मिलता और रोजगार के अवसर सृजित होते। हालांकि, तुलसानी द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन न करने के कारण रीको ने 25 नवंबर 2019 को उनका भूखंड निरस्त कर दिया। इसके बाद, तुलसानी ने विभिन्न स्तरों पर अपील दायर की, जो सभी खारिज कर दी गईं। उन्होंने रीको के खिलाफ 7 वाद भी उच्च न्यायालय जोधपुर और आईडीसी रीको के समक्ष दायर किए थे।

### **आरटीआई का अत्यधिक उपयोग:**
भूखंड निरस्तीकरण से असंतुष्ट होकर, तुलसानी ने 6 महीने में लगभग 400 आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किए। इससे रीको के कर्मचारियों का काफी समय और संसाधन खर्च हुआ। सूचना आयोग ने भी पहले वर्ष 2021-22 में तुलसानी की द्वितीय अपीलों को निरस्त किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने आरटीआई आवेदन जारी रखे।

### **निष्कर्ष:**
यह मामला राज्य में सूचना के अधिकार (RTI) के दुरुपयोग का एक स्पष्ट उदाहरण है, जिसमें सरकारी संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग हुआ है। इस निर्णय के बाद संभवतः भविष्य में आरटीआई का जिम्मेदार और सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एक मिसाल कायम की जाएगी। रीको द्वारा जारी किए गए इस अर्थदंड से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी कानून या अधिकार का दुरुपयोग सरकार और सार्वजनिक संसाधनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

Picture of Gordhan Soni

Gordhan Soni

खबर

http://

Related Post

error: Content is protected !!